22. औद्योगिक विवाद विधेयक - Page 265

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

लिए केवल इतना ही प्रमाणित करना आवश्यक है। मालिक की हाजिरी-बही और संघ की हाजिरी-बही के हिसाब से कर्मचारियों की प्रतिशतता 50 प्रतिशत से कम हो गई है। जैसा कि मैंने कहा, औद्योगिक शर्तों के तहत जहां काम घटता-बढ़ता रहता है और तदनुसार मजदूर भी घटते-बढ़ते रहते हैं, वहां इन शर्तों की पूर्ति करना असंभव है।

महोदय! एक और प्रावधान है, जिसकी ओर मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करना आवश्यक समझता हूं, और वह यह है कि उस संघ का क्या होगा, जिसका पंजीकरण रद्द कर दिया गया है? क्या वह फिर से पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है? उत्तर है कि विधेयक का खंड 54 औद्योगिक अदालत को किन्हीं परिस्थितियों के अंदर यह घोषणा करने की शक्ति देता है कि संघ का पंजीकरण रद्द हो गया है। इसके अनुसार :

इस अधिनियम के अंतर्गत अगर किसी प्रक्रिया में, औद्योगिक अदालत यह पाती

है कि किसी संघ का पंजीकरण अथवा किसी संघ की घोषणा योग्य श्रमिक

संघ के रूप में या प्रतिनिधि संघ के रूप में गलती से या गलत स्थिति दिखा

कर की गई हो या किसी ऐसे संघ ने इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान का

उल्लंघन किया हो, तो औद्योगिक अदालत यह निर्देश दे सकती है कि ऐसे संघ

के पंजीकरण को अथवा ऐसे संघ की, योग्य श्रमिक संघ या प्रतिनिधित्व संघ

के रूप में की गई घोषणा को रद्द कर दिया जाए।

अब, खंड 8 को लें, जिसमें रजिस्ट्रार को दिए गए ये निर्देश निहित हैं कि पंजीकरण के मामले में उन्हें किन नियमों का पालन करना है। सदन देखेगा कि जो मैं कह रहा हूं, वह बिल्कुल सही है। खंड 8 का पाठ इस प्रकार है :

धारा-7 के अंतर्गत पंजीकरण के लिए किसी संघ से आवेदन प्राप्त होने और

निर्धारित शुल्क की अदायगी हो जाने पर रजिस्ट्रार जैसा ठीक समझे वैसी

जांच कर सकता है, बशर्ते कि वह इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि वह संघ

पंजीकरण के लिए धारा-7 में उल्लिखित आवश्यक शर्तों को पूरा करता है और

अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण के लिए अयोग्य नहीं है।

यह भी खंड 8 द्वारा निर्धारित शर्तों में से एक है कि संघ को खंड 54 के अंतर्गत अयोग्य न ठहराया गया हो। अब मैं प्रश्न पूछना चाहता हूं कि ऐसी स्थायी अयोग्यता क्यों होनी चाहिए? मैं यह समझता हूं कि कुछ समय के लिए अयोग्यता हो सकती है। यह बहस करना संभव हो सकता है कि जिस व्यक्ति ने पंजीकरण धोखे से, गलत तथ्यों को प्रस्तुत करके कराया है, उसे कुछ समय के लिए परिवीक्षाधीन रखा जाए। मैं इस तरह के प्रस्ताव के औचित्य को भली-भांति समझ सकता हूं, लेकिन मैं उस प्रावधान के औचित्य को नहीं समझ सकता, जो कहता है कि चूंकि एक व्यक्ति धोखे या गलत तथ्य प्रस्तुत करने का दोषी है, इसलिए उसे रजिस्ट्रार के