22. औद्योगिक विवाद विधेयक - Page 266

औद्योगिक विवाद विधेयक 249

समक्ष आने और अपने संघ का पंजीकरण कराने के लिए भी स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर देना चाहिए। महोदय! मैं इस संबंध में उस प्रावधान का उल्लेख करता हूं, जो 1935 के भारत सरकार अधिनियम में है। इस सदन के सदस्यों को भारत सरकार के अधिनियम में निहित कुछ अयोग्यताओं का सामना करना पड़ेगा। हम जानते हैं कि व्यक्ति चुनाव में इसलिए नहीं खड़े हो सकते, क्योंकि वह अयोग्य हैं ओर यह कि कुछ व्यक्ति चुने जाने के बाद भी विधान-मंडल के सदस्य नहीं बन सकते, क्योंकि वे अयोग्य हैं। मैं उनमें से एक था, जिसे अयोग्य ठहराया जा रहा था। यह कहा गया कि सरकार मेरी रक्षा को आ गई और मेरे लिए सीट बचाने में सफल हो गई, अन्यथा मैं अयोग्य ठहरा दिया जाता। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के अधिनियम में निहित अयोग्यताएं निश्चित रूप से स्थायी नहीं हैं। ये अयोग्यताएं अल्पकालिक हैं। समय के साथ यदि एक बार अयोग्यता खत्म हो जाती है, तो सदस्य चुनाव में खड़े होने और इस सदन का सदस्य बनने के काबिल हो जाता है। यदि भारत सरकार के अधिनियम में इसी सिद्धांत को मूर्तरूप दिया गया है और अगर हम उन सदस्यों की अयोग्यता, जो सदन में अपने अधिकारों, विशेषाधिकारों के उपयोग एवं कर्त्तव्य निर्वहन के लिए सभी नैतिक दोषों और हर तरह की चारित्रिक हीनता से मुक्त रहते हैं, स्थायी नहीं हैं, तो मैं पूछता हूं कि उन व्यक्तियों की अयोग्यता स्थायी क्यों होनी चाहिए, जो मजदूरों को संगठित कर रहे हैं। इसका कोई जवाब समझ में नहीं आता, वस्तुतः मैं कहूंगा कि यह उपबंध सचमुच कलकत्ता हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ के निर्णय को रद्द कर देता है। मुझे खेद है कि मैं जल्दबाजी में आया था, इसलिए मैं रिपोर्ट पर ठीक तरह से विचार नहीं कर सकता। लेकिन एक ऐसा मामला है, जिसके बारे में हो सकता है काफी सदस्यों को पता हो — कम से कम उन्हें, जो मजदूर राजनीति में दिलचस्पी लेते हैं — कि आपातकालीन शक्ति संबंधी अधिनियम के तहत एक संघ को रजिस्ट्रार ने अवैध घोषित कर दिया, क्योंकि उसको साम्यवादी चला रहे थे। जहां तक आपातकालीन शक्ति संबंधी अधिनियम का संबंध है, वह पूर्णतया वैध था। पर वह व्यक्ति और वे साम्यवादी जो संघ के प्रभारी थे, किसी तरह हारने वाले नहीं थे। उन्होंने एक और तरीका ढूंढ लिया और वह तरीका यह था कि नए नाम से पंजीकरण के लिए एक और आवेदन कर दिया जाए। रजिस्ट्रार को इसमें कुछ गड़बड़ी लगी, क्योंकि उसने देखा कि जिस व्यक्ति का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था और जो यह आवेदन कर रहा है, वह एक ही व्यक्ति है। उसने कहा, ‘मुझे रुकना चाहिए और इसकी जांच करनी चाहिए।’ इसलिए उसने इस नए संघ के कार्यकर्ताओं और संचालकों की जांच की जिन्होंने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। उसने कहा ‘आप वही व्यक्ति हैं मैं पंजीकरण नहीं करूंगा।’ वे कलकत्ता हाई कोर्ट में गए और कलकत्ता हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि संगठन के कार्यकर्ताओं की जांच करने का काम रजिस्ट्रार का