252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
कहा जाता। प्रत्येक वर्ष सरकार को अपना बजट पेश करना होता है। प्रत्येक वर्ष हमें सरकार का बजट मिलता है, जिसमें सरकार बताती है कि कितने मंत्रियों को लगाया गया है, मंत्री को कितने चपरासी दिए गए हैं, विभाग में कितने निरीक्षक हैं, कितने क्लर्क हैं। ऐसी ही और अन्य बातें बताई जाती हैं। ऐसे में सदन यह समझ सकता है कि संगठन अनावश्यक रूप से बड़ा है या नहीं और धन उचित रूप से व्यय किया गया है या नहीं। मिल मालिक या किसी उद्योग के मालिक को जिससे लाभ मिलता है और जो सिर्फ पूंजी से ही नहीं बल्कि अन्य लोगों के पसीने से भी कमाई करता है, अपने प्रबंध का पूर्ण विवरण देने के लिए बाध्य क्यों नहीं किया जाता? यह बहुत उचित मांग है। इसका लाभ यह होगा कि एक बार किसी उद्योग के मालिक द्वारा इस तरह बजट पेश किया जाएगा तो मजदूर यह महसूस कर सकेंगे और जांच सकेंगे कि मजदूरों में बांटी जाने वाली शेष राशि उन्हें उचित मात्रा में मिली है या कि मालिक ने कुल लाभ का अधिकांश हिस्सा स्वयं ले लिया है? समझौता बोर्ड के होने और मालिक से अपना बही-खाता पेश करने को कहने का क्या फायदा है, जबकि मजदूर को यह जांचने का मौका नहीं दिया गया है कि वास्तव में स्थिति क्या है? अगर मेरे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया को अपनाया जाता है, तो मुझे यकीन है कि इससे श्रमिक अशांति में कमी होगी, समझौता ज्यादा प्रभावशाली होगा और ज्यादा औद्योगिक शांति कायम होगी। जैसा मैंने सुझाव दिया है, यदि माननीय प्रधानमंत्री उसी तरह श्रम व पूंजी को समानता के आधार पर देखना चाहते हैं और निष्पक्षता चाहते हैं, तो विधेयक के प्रावधानों में इस निष्पक्षता के लिए कोई आधार नहीं है। दूसरे, पूंजी व श्रम के बीच कोई समानता नहीं है, क्योंकि कोई भी विवाद होने पर सरकार मालिक का पक्ष लेती है। यह बात हड़ताल के दिनों में सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए पुलिस बल से स्पष्ट हो जाती है। जनता के चंदे और कर से, जिसे हम सब वहन करते हैं, पुलिस बल चलाया जाता है। यह सब के फायदे के लिए किया जाता है। निस्संदेह, किसी भी सरकार को सिर्फ इसीलिए पुलिस बल का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है कि मजदूरों द्वारा की गई हड़ताल का परिणाम शांति का उल्लंघन होगा। यह दिखाना भी आवश्यक है कि उद्योग के किसी एक वर्ग विशेष द्वारा शांति भंग की गई है। अगर मजदूरों की किसी अनुचित मांग द्वारा शांति भंग होती है, तो आपका उनके विरुद्ध पुलिस बल का प्रयोग करना न्यायसंगत होगा। यदि दूसरी ओर मालिक के किसी बेतुके, अन्यायपूर्ण और समानता की भावना के प्रतिकूल कृत्य से शांति भंग होती हो, तो सरकार को मजदूरों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल करने का कोई अधिकार नहीं है। इन दोनों व्यवस्थाओं को मिलाकर ही मालिक व कर्मचारी के बीच सही समानता लाई जा सकती है। मालिक को अपना
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 5, पृ. 1724-27, 17 मार्च 1939