बजट पर चर्चा
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर [] (बंबई नगर) : महोदय! मेरे माननीय वित्त मंत्री द्वारा यह दूसरा आर्थिक वक्तव्य प्रस्तुत किया गया है। इसलिए इस बजट की अधिक जांच और सूक्ष्म परीक्षण करना स्वाभाविक होगा। बजट के बारे में अपने विचार प्रस्तुत करने से पहले मैं यह बात नहीं भूल सकता कि बहस में भाग लेने वाले इस सदन के सभी सदस्यों ने इस बजट की प्रशंसा की है। माननीय वित्त मंत्री ने काफी संतोष का अनुभव किया होगा कि सभी वक्ताओं ने उनके कार्य की प्रशंसा की है। लेकिन मुझे आश्चर्य तो इस बात से है कि इस बजट की उस प्रकार प्रशंसा नहीं हुई है, जिस तरह से मेरे पूर्व वक्ताओं ने की है। उन्होंने जो आर्थिक वक्तव्य प्रस्तुत किया है, उस पर मैंने काफी मनन किया है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह बजट अभी तक मेरी जानकारी में सबसे घटिया ही नहीं, बल्कि एक खोखला और सारहीन बजट है। इसमें न तो भविष्य के बारे में कोई कल्पना है और न ही उन समस्याओं को पहचानने का प्रयास है, जिससे यह प्रेसिडेंसी जूझ रही है। ऐसा कहने में कुछ अतिशयोक्ति हो सकती है, लेकिन मैं अपने कथन की पुष्टि में कुछ कहना चाहूंगा। महोदय! एक मद के लिए सरकार मेरी प्रशंसा की पात्र हो सकती है, लेकिन दुर्भाग्य से प्रशंसा मेरे माननीय मित्र के लिए नहीं, बल्कि माननीय गृह मंत्री के लिए होगी। मैं नई योजना की मद संख्या 45 का उल्लेख करना चाहता हूं। इसमें 36,217 रुपए अतिरिक्त व्यय की व्यवस्था पुलिस बल में वृद्धि के लिए है।
महोदय! इस सदन के सरकारी पक्ष के सदस्यों का सरकार बनाने से पहले पुलिस के साथ संबंध सभी जानते हैं। मुझे सफेद पोशाक में कुछ लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पुलिस के पीछे-पीछे चलते हुए ‘पीली टोपी हाय-हाय’ के नारे लगाने वाला दृश्य अच्छी तरह याद है। एक समय जुल्म और दमन का हथियार समझी जाने वाली पुलिस के साथ कांग्रेस पार्टी की दोस्ती वास्तव में ऐसा मामला है, जिसके लिए माननीय गृह मंत्री की उनके लिए रुपए की मांग तथा वित्त मंत्री को उनके लिए वित्त व्यवस्था करने के लिए बधाई देनी चाहिए।
मेरी मान्यता के अनुसार, उन्हें पुलिस बल की निश्चित रूप से आवश्यकता है। उन्हें पुलिस वालों की वफादारी की जरूरत है, क्योंकि हम सब जानते हैं कि वह पुलिस वालों को लेकर क्या कर रहे हैं। इसका उदाहरण अभी हाल ही में देखने को मिला है। पुलिस बल का क्या इस्तेमाल किया जा रहा है। मैं ‘धारावी’ में हुए गोली कांड का उल्लेख करना चाहता हूं। जैसा कि मैं महसूस करता हूं, श्रमिकों के हितों के प्रति वर्तमान सरकार की हमदर्दी नगण्य है और मुझे विश्वास है कि उन्हें श्रमिक
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 168-79, 2 मार्च 1936डॉ. अम्बेडकर का बंबई विधान सभा के लिए चुनाव 1937 में हुआ था और सोमवार, 19 जुलाई 1937 को उन्होंने सदस्य के रूप में शपथ ली थी।