23. उपद्रव जांच समिति की रिपोर्ट - Page 271

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उपद्रव जांच समिति की रिपोर्ट *

डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : मैं अपनी बात पांच मिनट में समाप्त करने की कोशिश करूंगा, क्योंकि मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहना है। अध्यक्ष महोदय! अगर मैं इस कटौती प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं, तो इसका कारण यह नहीं है कि मैं यह समझता हूं कि समिति ने मेरे बारे में जो कुछ कहा है, उसके संबंध में कुछ कहूं। इसके लिए न तो समय है और न ही मेरे विचार में इसकी कोई जरूरत है कि इस हड़ताल के संबंध में मैंने जो रुख अपनाया है, उसके बारे में तर्क पेश करूं। अतः मैं इस मामले में नहीं बोलूंगा। मेरे बोलने का अभिप्राय यह है कि मेरे विचार से मुझसे पहले बोलने वाले सदन के दो माननीय वक्ताओं ने जो भाषण दिया है, उनसे मुझे ऐसा लगा है कि वे इस रिपोर्ट के फलस्वरूप उत्पन्न हमारे द्वारा विचारणीय मुख्य मुद्दों से हमारा ध्यान हटा देंगे। मेरे विचार में तीन प्रश्न हैं, जिन पर हमें विचार करना है। तीन नहीं तो दो तो ऐसे हैं, जिन पर विचार करना है। तीन प्रश्न मैं गृह मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं। दलील के तौर पर उपद्रवों के संबंध में निष्कर्ष जिस रूप में हैं, उन्हें मैं स्वीकार करता हूं।

श्री जमनादास मेहता : वे निष्कर्ष नहीं थे, बल्कि ये मुद्दे समिति के लिए बनाए गए थे।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : जो भी हो, समिति ने जो रिपोर्ट दी है, वह यह है और यह बहुत ही सुस्पष्ट शब्दों में है। पैरा 84 में कहा गया है :

भीड़ का व्यवहार और कार्यवाहियां ही गोली चलाए जाने के लिए जिम्मेदार

थीं। हमारा विचार है कि एलफिंस्टन मिल में जो उपद्रव हुआ और जिसके

फलस्वरूप गोली चलानी पड़ी तथा लोग हताहत हुए, इसकी जिम्मेदारी अंततः

संघर्ष समिति के सदस्यों पर जाती है, जिन्होंने हड़ताल को सफल बनाने के

लिए अपने जोरदार प्रचार के द्वारा निरक्षर मजदूरों को हिंसा का सहारा लेने

के लिए उकसाया।

जैसा कि मैंने कहा, मैं इस जांच के निष्कर्ष की सच्चाई का पता लगाने नहीं