256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
कानूनन कोई विशेष दायित्व है। नागरिक व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से
बुलाया गया सैनिक मात्र शस्त्रधारी नागरिक है। बेकार किसी की जान लेने
के लिए सैनिक होने का बहाना काम नहीं आता। ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट
और पुलिस अधिकारी, यदि सेना को बुलाने का या न बुलाने का फैसला करते
हैं, तो उसके पीछे यही बात है। एक सैनिक केवल अपने शस्त्र का प्रयोग कर
सकता है। उसके शस्त्र घातक होते हैं। उनका इस्तेमाल हो तो यह खतरा
रहता है कि या तो कोई मरेगा या किसी का अंग भंग होगा और खासतौर से
जब आजकल उन्नत तरीके हैं और सुधरे हथियार हैं, उनसे बेकसूर राहगीरों
या दूर खड़े लोगों के लिए भी खतरा है। दंगाइयों के विरुद्ध सहायता के लिए
उन लोगों को बुलाना, जिन्हें केवल गंभीर स्थिति में बुलाया जाता है, प्रशासनिक
अधिकारियों का अंतिम हथियार होना चाहिए।
और जहां तक इस देश के कानून का संबंध है, तो वह इस प्रकार है — संक्षेप में संवैधानिक कानून के एक बहुत बड़े लेखक प्रो. डायसी के अनुसार, कानून यह है कि अगर एक पुलिस अफसर या सैनिक अफसर को जब गोली चलाने के लिए कहा जाता है, वह उस समय अपने अधिकारी की आज्ञा का पालन नहीं करता है, तो उसे कोर्ट मार्शल द्वारा फांसी दे दी जाएगी और अगर वह उसका पालन करता है तथा एक निर्दोष आदमी को मार देता है, तो उसे एक न्यायाधीश या जूरी द्वारा फांसी दे दी जाएगी। उसके मामले को निश्चय ही इस पर आधारित होना चाहिए कि क्या उसने अनुचित बल का प्रयोग किया है। मैं जो तर्क देना चाहता हूं वह यह है कि यहां समिति ने पुलिस के व्यवहार को उचित माना है। अपने माननीय मित्र से जो बात मैं पूछ रहा हूं, वह केवल यह है कि अगर उन्हें इस दस्तावेज पर भरोसा है, जिसे तीन योग्य और सम्माननीय लोगों ने लिखा है, तो वह क्यों नहीं उन लोगों के विरुद्ध मुकदमा चलाते हैं? अगर एक जूरी स्वीकार करती है कि आवश्यकता थी और एक जूरी मानती है कि कोई क्षति नहीं हुई थी, तब तो ठीक है। हमें न्यायाधीश या जूरी का फैसला मिलना चाहिए और मैं इसको इस प्रकार से रखता हूं कि अगर वह संघर्ष समिति के सदस्यों और पुलिस अफसरों पर मुकदमा नहीं चलाते, तो इस रिपोर्ट का मूल्य टूली स्ट्रीट के तीन दर्जियों द्वारा लिखी गई कहानी या उपन्यास से अधिक नहीं हो सकता (ठहाका)।
और तीसरा प्रश्न जो मैं पूछना चाहता हूं, वह जानकारी के लिए है। महोदय! मुझे सूचना दी गई है और अत्यंत विश्वसनीय रूप से सूचना दी गई है। मैं इस सूचना को माननीय गृह मंत्री के समक्ष रखता हूं कि स्प्रिंग मिल जिसके आसपास उस दिन 6.30 बजे या ऐसे ही किसी समय गोली चली। उसके प्रबंधक ने गोली
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 7, पृ. 1972, 25 अक्टूबर 1939