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उपद्रव जांच समिति की रिपोर्ट 257

चलाने वाले पुलिस अफसर को इनाम के रूप में बांटने के लिए 200 रुपए इस विशेष निर्देश के साथ भेजे कि यह रकम उन पुलिस अफसरों में इनाम के रूप में बांट दी जाए, जिन्होंने उस मिल के आसपास हुए उस दिन के दंगे या गोली चलाने में भाग लिया था, तो मैं पूछना चाहता हूं कि क्या यह कहना उचित नहीं है कि गोली इस कारण चलाई गई क्योंकि वहां हिंसा फैली हुई थी, बल्कि इस कारण से चलाई गई थी कि मिल प्रबंधक ने पुलिस अफसरों को अपना काम बखूबी करने के लिए कहा था। यह बहुत ही शर्मनाक और बदनामी की बात है। मैं चाहता हूं कि माननीय गृह-मंत्री इस तथ्य को काफी गंभीरता से लें, क्योंकि अगर यह तथ्य है, तो यह पुलिस बल सरकार के द्वारा कायम किया गया पुलिस बल है, इसलिए नहीं कि यह वर्गों के बीच न्याय करे, बल्कि यह पुलिस बल मजदूरों के आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से पूंजीपतियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले भाड़े के गुंडों और हत्यारों का पक्ष लेने वाला है।

इस घटना से मुझे कंपकंपी होने लगती है और यह मुझे उस बात की याद दिलाती है, जिसे किसी बहुत योग्य सिविलियन ने संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी गवाही के दौरान कही थी। मैं स्व. माननीय एडवर्ड थॉमसन की गवाही का उल्लेख कर रहा हूं, जो कुछ समय पंजाब के गवर्नर और कुछ समय वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे थे। अपनी सेवा निवृत्ति के बाद उन्होंने भारत को स्वशासन देने का समर्थन करने के लिए इंग्लैंड में अपनी एक संस्था शुरू की थी। जैसा कि सदन का प्रत्येक सदस्य जानता है कि गोलमेज सम्मेलन हुआ, उस समय जो सिविलियन भारत से वापस इंग्लैंड चले गए थे, वे दो गुटों में बंट गए थे। एक गुट भारत के लिए स्वशासन का विरोध करता था और दूसरा गुट उसका समर्थन। स्व. माननीय एडवर्ड थॉमसन उनमें से एक थे, जिन्होंने भारतीय दावे का समर्थन करने वाले गुट का नेतृत्व किया। उस गुट के सदस्य के रूप में वह संयुक्त संसदीय समिति के सामने गवाही देने और भारत को स्वशासन क्यों मिलना चाहिए इस संबंध में अपना दृष्टिकोण रखने आए। हम सब बहुत खुश थे कि कम से कम भारतीय सिविलियनों का एक भाग तो भारतीय उद्देश्य के समर्थन के लिए ईमानदारी से एवं पूरी तरह से सामने आया है। लेकिन मैं खरी-खरी बात कहूंगा कि मैं उनके द्वारा दिए गए तर्क से भयभीत हो गया। वह तर्क क्या था, जो उन्होंने दिया? जो तर्क उन्होंने दिया वह इस प्रकार था, उन्होंने कहा, मैं एक आयरिश व्यक्ति हूं। मैं दक्षिणी आयरलैंड में रहता हूं। मैंने 1916 के दरम्यान और उसके बाद होने वाले विद्रोहों को देखा है। उन्होंने कहा कि एक बात जिसने मुझे आयरिश स्वशासन का समर्थन करने का यकीन दिलाया, वह थी, जब तक विद्रोह चल रहा था, कोई भी अंग्रेज किसी आयरिश को, चाहे उसका काम कितना भी हिंसक क्यों न हो, गोली नहीं मार सकता था। क्योंकि यदि कोई अंग्रेज किसी आयरिश को गोली मार देता, तो सारा