258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
आयरलैंड शस्त्र उठा लेता। उन्होंने कहा कि जैसे ही स्वशासन दिया गया, वैसे ही कासग्रेव आयरिश व्यक्ति को गोली मार सका और इसके विरुद्ध कोई विद्रोह नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारत को स्वशासन देने से अंग्रेजों को एक फायदा यह होगा कि भारत के मंत्री भारतीयों को बिना किसी हिचक के गोली मार देने में समर्थ होंगे। और ठीक यही हो रहा है। यह पहला अवसर नहीं है, जबकि उपद्रव हुआ है।
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य को समय-सीमा का ध्यान दिलाना चाहता हूं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैं आपका बहुत कृतज्ञ हूं। मैं एक मिनट में समाप्त करूंगा।
जैसा कि मैंने कहा है, यही एकमात्र अवसर नहीं है, जबकि उपद्रव हुआ है। अगर मेरे माननीय मित्र सरकारी फाइलों में खोजें, तो वे पाएंगे कि इससे पहले बहुत सारे अवसर आए थे, जबकि इनसे भी बड़े उपद्रव हुए थे। एक ही उदाहरण लीजिए, जब प्रिंस ऑफ वेल्स इस देश में आए थे। उस समय जो दंगे हुए थे, वे कितने व्यापक थे? 1928-29 में जो उपद्रव हुए, वे कितने व्यापक थे? निश्चय ही उपद्रवों का होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन वे कभी भी दूसरे ढंग के नहीं हो सकते। एकमात्र प्रश्न यह है कि क्या शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए हम आजादी और स्वतंत्रता का कोई आदर नहीं करेंगे? और यदि स्वशासन का इसके सिवाए और कुछ मतलब नहीं है, तो जैसा कि मैं सोच रहा हूं, इसका मतलब और कुछ नहीं हो सकता कि हमारे अपने मंत्री अपने लोगों को गोली मार सकते हैं और हममें से बाकी लोग इस प्रदर्शन पर केवल हंसें या उसका समर्थन करने के लिए खड़े हों क्योंकि वह एक खास पार्टी का आदमी है, तब मैं कहता हूं कि स्वशासन भारत के लिए एक अभिशाप ही है, कोई वरदान नहीं (तालियां)।