24. युद्ध में भागीदारी परिशिष्ट - Page 279

262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

संविधानों को, प्रभावी बनाएगी और यह कि इस प्रकार बना संविधान अल्पसंख्यक समुदायों की स्वतंत्रता की रक्षा करे और आगे यह है कि भारत की वर्तमान शासन व्यवस्था के सिद्धांत को प्रभावी बनाने के लिए ठीक इसी समय, जहां तक संभव हो, उचित कार्यवाही की जानी चाहिए। ऐसा मूल सिद्धांत होने पर देश की शासन व्यवस्था के लिए बनाई गई मशीनरी में अपने विश्वस्त प्रतिनिधियों के द्वारा अपनी आवाज उठाने के उपर्युक्त अल्पसंख्यकों के मूल अधिकार के लिए इस प्रकार की कार्रवाई, उसका अल्पीकरण नहीं करेगी।

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर * : महोदय! मैं व्यवस्था का प्रश्न उठाता हूं। मेरा निवेदन है कि यह संशोधन नियम विरुद्ध है और मैं एक बार फिर नियम 75 के उप-खंड (क), पृष्ठ 20 पर विश्वास करता हूं। उप-खंड (क) कहता है कि प्रस्ताव को स्पष्ट और यथावत उल्लिखित होना चाहिए और एक स्पष्ट मुद्दा उठाया जाना चाहिए। मैं ‘एक स्पष्ट’ मुद्दा शब्दों पर जोर दे रहा हूं। मेरा निवेदन है कि यदि यह संशोधन प्रस्ताव का हिस्सा बन जाएगा, तो पूरा प्रस्ताव नियम 75 के उप-खंड (क) का उल्लंघन करेगा, क्योंकि उस दशा में प्रस्ताव के तहत एक से अधिक मुद्दे आ जाएंगे, यद्यपि जैसा कि मेरे पूर्ववर्ती वक्ताओं ने बताया है कि यह प्रस्ताव चार या पांच अलग-अलग मामलों पर विचार करता है। यह स्वीकार किया जा सकता है कि ये सभी चार या पांच मामले एक मुद्दे से उत्पन्न हुए हैं और वह मुद्दा इस देश के द्व ारा अपेक्षित युद्ध नीति और उसकी घोषणा से संबंधित है, लेकिन इस संशोधन के द्वारा उठाया गया प्रश्न जिसका संबंध मंत्रिमंडल में विश्वास प्रकट करने से है, मेरा मानना है कि यह प्रश्न एक स्पष्ट, सुनिश्चित और पृथक मुद्दा है और इसे प्रस्ताव का वैध हिस्सा नहीं बनाया जा सकता ताकि नियम 75 के उप-खंड (क) के प्रावधानों से इसकी संगति बैठी रहे। महोदय! मैं आपका ध्यान इस मुद्दे पर दिए गए व्यवस्था निर्देश की ओर दिलाना चाहूंगा, जो पृष्ठ 148 पर उद्धृत है और जिसकी संख्या 23 है। इसमें कहा गया है, ‘किसी संकल्प को निश्चय ही एक-दूसरे से भिन्न दो स्पष्ट मुद्दों को रखने का दोष नहीं होना चाहिए।’

यह वह निर्देश है, जो 1921 के खंड 2, पृ. 1425 से लिया गया है। उस मामले में महिलाओं के मताधिकार के संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था और व्यवस्था के प्रश्न पर कहा गया था कि यद्यपि प्रस्ताव एक ही है, तथापि यह दो स्पष्ट मुद्दों को उठाता है। एक तो महिलाओं के मतदान का अधिकार और दूसरा महिलाओं के सदन में बैठने का अधिकार और उस समय के अध्यक्ष ने यह निर्देश दिया था कि चूंकि प्रस्ताव में दो स्पष्ट मुद्दे थे, इसलिए यह नियम विरुद्ध है। मेरा निवेदन है कि इसी आधार पर

*** बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 7, पृ. 1976, 25 अक्तूबर 1939बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 7, पृ. 1978, 25 अक्तूबर 1939