12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
वर्गों के खिलाफ और भी पुलिस बल का प्रयोग करना पड़ेगा। कांग्रेस मंत्रिमंडल को भी अपनी असलियत दिखाने के लिए बधाई दी जानी चाहिए। अब मैं इस विषय को यहीं पर समाप्त करता हूं, क्योंकि आगे इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जिसके संबंध में सरकार श्रेय ले सके।
महोदय! अब मैं सर्वप्रथम सदन का ध्यान वित्तीय अनियमितताओं के कुछ उदाहरण् ां की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। मेरे सामने पांच मदें हैं, जिन्हें मैंने माननीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किए गए वित्त वक्तव्य से लिया है, अर्थात् मद संख्या 53 जिसमें शिक्षा के लिए 24 लाख रुपए, मद संख्या 105 जिसमें ग्राम पंचायत के लिए 4 लाख रुपए, मद संख्या 46 जिसमें स्वैच्छिक पुलिस बल के लिए 25,000 रुपये, मद संख्या 100 जिसमें श्रमिक सुविधाओं के लिए एक लाख रुपए और मद संख्या 67 जिसमें यूनानी हकीमों के प्रशिक्षण के लिए 80,000 रुपए के खर्च की व्यवस्था है। महोदय! जो अधिकृत रिपोर्ट (ब्लू बुक) वितरित की गई है, उसको देखने से पता चलता है कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि वित्त प्रस्तावों में शामिल की गई इन मदों के लिए कोई भी योजना अस्तित्व में नहीं है। ये सभी शीर्ष जिन पर खर्च करने का विचार है, अभी विचाराधीन हैं। उन्हें स्वयं ही नहीं पता है कि वे उद्देश्य क्या हैं, जिन पर यह रुपया खर्च होना है। दूसरी बात यह है कि इस सदन ने कोई वैधानिक उपाय नहीं पारित किया है, जिसके जरिए इन मदों पर खर्च किया जा सके। महोदय, ये खर्चे सदन से जाली चैक की मांग करते हैं, जिससे कि सरकारी सदस्य इसे पूरी आजादी के साथ किसी भी चीज पर मनमाने ढंग से खर्च कर सकें और यह खर्च शिक्षा, पुलिस आदि जैसे शीर्षों के अंतर्गत दिखा सकें, जिसके लिए कुल मिलाकर 31 लाख रुपए की मांग की गई है। अब यदि कोई इस तथ्य पर विचार करे, तो आसानी से समझ सकता है कि नई मदों की सारी रकम जिसे माननीय वित्त मंत्री ने मौजूदा बजट में जोड़ा है, लगभग 1.16 लाख रुपए होती है और इस राशि को सरकार सदन के हाथ से निकाल कर अपने तरीके से खर्च करना चाहती है। महोदय! मुझे यह कहना पड़ता है कि सरकार लगातार सदन के विशेषाधिकारों का अतिक्रमण कर रही है। मेरे माननीय मित्र गृह मंत्री दुर्भाग्य से यहां उपस्थित नहीं हैं और इसका मुझे खेद है, क्योंकि मैं एक-दो बातों का हवाला देना चाहता हूं, जिसके लिए वह जिम्मेदार हैं। मैंने प्रायः देखा है कि जब से कांग्रेस सरकार ने कार्यभार संभाला है, माननीय गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि इस सदन को ऐसे किसी नियम के संबंध में निर्णय करने का अधिकार नहीं है, जिसे सरकार ने सदन द्वारा पारित किसी खास कानून के तहत संपन्न किया हो। महोदय! मेरा कहना है कि यह इस सदन के प्राधिकार का अतिक्रमण है। मैं यह कह सकता हूं कि इस तरह के कई नियम हैं। कुछ ऐसे नियम हैं, जो सिर्फ प्रशासनिक नीति को क्रियान्वित करने में ही इस्तेमाल होते हैं। कुछ नियम केवल कानून के हिस्से हैं और मैं दावा करता हूं कि जहां कोई नियम कानून का हिस्सा है,