24. युद्ध में भागीदारी परिशिष्ट - Page 283

266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

स्थिति में है। मान लीजिए कि इस देश की सुरक्षा का प्रश्न उठा, तो हमारी सेना कहां है? नौसेना कहां है? हवाई जहाज कहां है, जो इस देश की रक्षा कर सकें? गोलमेज सम्मेलन के सदस्य के रूप में, मुझे याद है कि हम एक सिद्धांत के लिए लड़े थे और वह सिद्धांत यह था कि भारत की रक्षा ग्रेट ब्रिटेन की जिम्मेदारी के रूप में जानी जाए और भारतीयों को अपनी सुरक्षा करने की शिक्षा दी जाए। मुझे यह कहते हुए दुःख होता है कि जहां तक मैंने भारत सरकार की रक्षा नीति का अवलोकन किया है, उस विषय में उन्होंने कोई संतोषप्रद उपाय नहीं किया है। जहां तक उस सिद्धांत पर अमल करने का प्रश्न है, मैं उनकी नीतियों में कुछ भी नहीं पाता। इसलिए मैं समझता हूं कि यह एक वाजिब शिकायत है, जो भारत कर सकता है। अब यही वे मुद्दे हैं, जिन पर मैं सरकार से सहमत हूं, लेकिन मुझे यह कहते हुए दुःख है कि यहीं मेरी सहमति समाप्त हो जाती है।

महोदय! जैसा कि आप जानते हैं, मैंने सभी चारों संशोधन प्रस्तावित कर दिए हैं। वे तीन हैं, किंतु वास्तव में चार हैं। मैं उन दो संशोधनों को एक साथ लेने का प्रस्ताव रखता हूं, जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में हैं और बाकी संशोधनों को मैं अलग-अलग लूंगा। मेरा सदन के सामने संशोधनों को फिर से पढ़ने का विचार नहीं है, क्योंकि मैं समय बचाना चाहता हूं। सदन पूरी तरह जानता है कि ये संशोधन क्या हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने अपने भाषण को समाप्त करते हुए संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान में शामिल सिद्धांत की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने अमरीका के संविधान से एक उद्धरण पढ़ा, जिसमें लोकतंत्र का, जीवन और स्वतंत्रता का तथा सुख की खोज का उल्लेख है और उन्होंने हमसे जो विपक्षी बेंच पर बैठे हैं, अनुरोध किया है कि हम उस पुरातन और अत्यंत मानवीय दस्तावेज के प्रति जिसमें लोकतंत्र का सिद्धांत शामिल है, आदर करें। अपनी तरफ से मैं माननीय प्रधानमंत्री को दक्षिण अमरीका से संबंधित मामलों की स्थिति का पुनः स्मरण कराने की छूट चाहूंगा। उन्होंने उत्तरी अमरीका का उल्लेख किया है, जबकि मैं दक्षिण अमरीका का उल्लेख करूंगा, वे ऐसे देश हैं, जो एक-दूसरे के बहुत नजदीक हैं। मुझे विश्वास है कि मेरे माननीय मित्र प्रधानमंत्री इस तथ्य को याद रखेंगे कि जब स्पेन के अमरीकी उपनिवेश, जैसे कि ब्राजील और अन्य देश स्पेनी साम्राज्य से अलग हुए, तो उन्होंने भी अपना अलग-अलग संविधान बनाने का सोचा। उन्हें पता नहीं था कि अपना संविधान कैसे बनाया जाए। फलतः उन्होंने एक आदमी की सहायता ली और मुझे विश्वास है कि हमारे प्रधानमंत्री उससे परिचित हैं। उन्होंने बस यही किया कि सारे मामले को जेरमी बेंथम के सुपुर्द कर दिया। यदि बाहर के लोगों को नहीं भी पता तो सारे वकील तो उसका नाम जानते ही हैं। जेरमी बेंथम बहुत बड़ा विधि-वेत्ता था, वह ऐसा आदमी था, जो विधिसूत्र बनाने में लगा रहता था। वह विवेकपूर्ण ढंग से अंग्रेजी कानून में सुधार लाना चाहता था। दक्षिण अमरीकी