युद्ध में भागीदारी
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कि जितनी सामग्री मेरे पास है, उसे प्रस्तुत करने के लिए मुझे एक दिन नहीं, बल्कि एक महीना लगेगा। अब, मैं जो दूसरा प्रश्न पूछ रहा हूं, वह यह है : उत्पीड़न के खिलाफ अनुसूचित जातियां किस प्रकार का संरक्षण प्राप्त करती हैं? इस मुद्दे पर सदन के सामने अपने विचार व्यक्त करने से पहले मैं देश के प्रशासन की संरचना पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मेरे पास केवल बंबई प्रेसिडेंसी के आंकड़े हैं। किंतु मेरे विचार में ये आंकड़े प्रतीकात्मक हैं — ये केवल इस प्रांत के लिए सही नहीं होंगे, बल्कि भारत के किसी भी हिस्से के लिए यह सही होंगे। इस प्रेसिडेंसी के प्रशासन में किस तरह के लोग हैं? जिस तरह के लोग भी हैं, मैं उनके बारे में सरकार के द्वारा दिए आंकड़ों को ले रहा हूं। वे मेरे अपने आंकड़े नहीं हैं। सबसे पहले मैं अनुसूचित जाति और राजस्व विभाग को ले रहा हूं। जहां तक जिला डिप्टी कलक्टरों का संबंध है, वे 33 हैं और उनमें से केवल एक अनुसूचित जाति का है। इस प्रांत में 100 मामलातदार में से केवल एक अनुसूचित जाति का है। कुल 34 महलकारी हैं, किंतु उनमें से कोई भी अनुसूचित जाति का नहीं है। और अब राजस्व विभाग में क्लर्कों की संख्या को लेते हैं। उनकी कुल संख्या 2,444 है। उनमें से अनुसूचित जाति के क्लर्कों की संख्या केवल 30 है।
अब हम लोक निर्माण विभाग को लें। लोक निर्माण विभाग में 829 क्लर्क हैं। उनमें से अनुसूचित जाति के सात क्लर्क हैं। आबकारी विभाग में 189 क्लर्क हैं। उनमें से अनुसूचित जाति के तीन से अधिक क्लर्क नहीं हैं।
अब पुलिस विभाग को लें। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सब इंस्पेक्टरों की कुल संख्या 538 है। इनमें से केवल दो अछूत हैं। इस तरह यह स्पष्ट है कि प्रशासन में पूरी तरह से हिन्दू भरे हुए हैं। उस पर कोई प्रश्न उठाया ही नहीं जा सकता।
अब मैं सदन का ध्यान इस बात पर आकर्षित करना चाहूंगा कि इस प्रांत में अन्य अल्पसंख्यकों की तुलना में अनुसूचित जातियों की स्थिति किस प्रकार की है। राजस्व विभाग में जहां तक जिला डिप्टी कलक्टरों का संबंध है, 33 में आठ मुस्लिम हैं, तीन ईसाई हैं और केवल एक अनुसूचित जाति का है। 100 मामलातदारों में, 30 मुस्लिम, तीन ईसाई और केवल एक अनुसूचित जाति का है। कुल 34 महलकारियों में से, चार मुसलमान हैं, तीन ईसाई हैं, किन्तु अनुसूचित जाति से कोई भी नहीं है। कुल 246 प्रधान कारकूनों में से 17 मुसलमान हैं, सात ईसाई हैं, लेकिन अनुसूचित जाति से कोई नहीं है। कुल 2,444 क्लर्कों में से 283 मुसलमान हैं, 61 ईसाई हैं, 58 पिछड़े वर्ग के लोग और 30 अनुसूचित जाति के लोग हैं। पुलिस विभाग में 538 सब इंस्पेक्टरों में से 106 मुसलमान हैं, 17 ईसाई हैं, छह पिछड़े वर्ग के लोग हैं और केवल दो अछूत हैं। लोक निर्माण विभाग के 829 क्लर्कों में से 41 मुसलमान हैं, 28 ईसाई हैं, सात पिछड़े वर्ग के और सात अछूत हैं। आबकारी विभाग के 189 क्लर्कों में से 13 मुसलमान, 19 ईसाई और तीन अछूत हैं।
इसलिए, प्रारंभ में जिस स्थिति के साथ हमें शुरू करना चाहिए, वह यह है