I. जन्म.नियंत्रण के उपाय - Page 302

परिशिष्ट I
जन्म-नियंध्ण के उपाय *

श्री पी.जे. रोहम : (अहमदनगर दक्षिण) : महोदय! मैं यह प्रस्ताव रखने की अनुमति चाहता हूं कि :

यह सभा परिवार को सीमित करने की तात्कालिक आवश्यकता को ध्यान में रखते

हुए सरकार से सिफारिश करती है कि इस प्रांत की जनता में जन्म-नियंत्रण

के लिए सरकार को व्यापक प्रचार करना चाहिए और जन्म-नियंत्रण के कार्य

के लिए समुचित सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए।

प्रश्न प्रस्तावित।

श्री पी. जे. रोहम (सदन को मराठी में संबोधित किया) :

जन्म-नियंत्रण की अनिवार्यता को शिक्षित वर्ग ने, अब तक, पूरी तरह से समझ लिया है और सौभाग्य से हमारे देश में नेता भी इस विषय पर एकमत हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू, गुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर और श्रीमती सरोजिनी नायडू जन्म-नियंत्रण आंदोलन के महत्त्व एवं अनिवार्यता को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और गर्भ निरोधकों के पक्ष में भी हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बाबू सुभाषचन्द्र बोस ने भी अपने अध्यक्षीय भाषण में यह कहा है :

यदि हमारी जनसंख्या, जैसा कि निकट अतीत में हुआ है, दिन-दूनी रात चौगुनी

बढ़ती गई, तो संभव है हमारी योजनाएं असफल हो जाएं।

यहां तक कि बहुत समय पहले महात्मा गांधी ने भी लिखा था : “उस दुःख को मैं पाठकों से छिपाना नहीं चाहता, जो मुझे देश में जन्म संबंधी सूचना पाकर होता है।“

शारीरिक, मानसिक या आर्थिक रूप से विकलांग लोगों से उत्पन्न बच्चों के द्वारा जो असीम हानि उठानी पड़ती है, उसका यथेष्ठ अनुमान बहुत कम लोगों को होता है। इससे माता-पिता एवं समाज दोनों को ही बहुत हानि उठानी पड़ती है। ऐसे बच्चों के जन्म की रोकथाम से प्रसव तथा प्रसव-जन्म रोगों से मरने वाली माताओं की मृत्यु दर व शिशु-मृत्यु दर में बहुम कमी आएगी; जीवन की प्रधान आवश्यकताओं तक के अभाव से भी होने वाले रोगों को दूर कर जन साधारण के