जन्म-नियंत्रण के उपाय पर
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अनुभव एक अन्य वैज्ञानिक डॉ. जे. एम. मुनरो, एम.डी.एफ.आर.एफ.पी.एस. को हुआ है जिसने अपनी पुस्तक मैटरनल मोर्टेलिटी एंड मौबीडिटी में लिखा हैः
परिवार सीमित करने के पक्ष में सबसे प्रबल तर्क यह है कि चौथे प्रसव तक
मृत्यु-दर प्रायः प्रथम प्रसव के अति समीप पहुंच जाता है, तो साधारणतया देखा
गया है कि बहुत ही गंभीर एवं घातक होता है। चौथे प्रसव के बाद मृत्यु-दर
उत्तरोत्तर प्रत्येक गर्भ और प्रसव के साथ नियमित एवं स्पष्ट रूप से बढ़ती जाती
है। मृत प्रसव एवं नवजात मृत्यु के साथ भी यही लागू होता है।
अत्यधिक शिशु-मृत्यु के कारण भारत जैसे देशों की जनसंख्या वृद्धि की दर इंग्लैंड सदृश देशों के समान नहीं है। जबकि पहले प्रकार के देशों की जन्म-दर दूसरे प्रकार के देशों से अधिक है। इंग्लैंड की जन्म-दर भारत की जन्म-दर का लगभग आधा है। फिर भी हम पाते हैं कि 1901 से 1931 के बीच इंग्लैंड की जनसंख्या में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उसी अवधि में भारत की जनसंख्या में केवल 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे समझा जा सकता है कि जन्म-नियंत्रण की प्रक्रिया को अपनाना जनसंख्या की वृद्धि के लिए भी अच्छा मार्ग है और इससे शिशु-मृत्यु-दर को भी कम किया जा सकता है।
यह भी स्मरण रखना चाहिए कि आधुनिक युद्ध के लिए अपेक्षाकृत कम लोगों की जरूरत है। युद्ध के लिए आधुनिक शस्त्रों से सज्जित अल्पसंख्य सेना भी ऐसी बहुसंख्य सेना को जीत सकती है जो बहुसंख्य होने पर शस्त्रों से सज्जित न हो। पहले के विश्व युद्ध में निम्न जन्म दर वाले देश उच्च जन्म-दर वाले देशों को जीत लेते थे।
संसार में हम बहुत से ऐसे समाजों को देख सकते हैं, जो संख्या में तो कम हैं किंतु धन, संस्कृति, आदि के मामले में विख्यात हैं। हमारे देश में पारसी समुदाय इसका अच्छा उदाहरण है। इसलिए संख्या के पीछे भागना कोई लाभदायक विचार नहीं है। “वरमेको गुणीपुत्रो न च मूर्ख शतान्यपि“ (सौ मूर्ख पुत्रों की अपेक्षा एक ही गुणी पुत्रा अच्छा है) वाली सूक्ति तो सुविख्यात ही है।
इसके पश्चात् यह बात भी ध्यान में रखने योग्य है कि मुख्य रूप से गरीबी ही विभिन्न जातियों, समाजों और देशों के मध्य विद्वेष का मूल कारण है। जब गरीबी को हटाया जाएगा विद्वेष के मूल कारण खत्म होंगे और तब किसी को दूसरे के उत्पीड़न से डरने की जरूरत नहीं होगी।
पाश्चात्य राष्ट्रों के उदाहरण से हमें ज्ञात होता है कि सभी जातियों एवं स्तरों के लोग आधुनिक गर्भ-निरोधक का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए यह धारणा निराधार है कि रोमन कैथोलिक जन्म-नियंत्रण के विरुद्ध हैं। फ्रांस एक रोमन कैथोलिक देश है फिर भी यह देश अपने न्यून जन्म-दर के लिए प्रसिद्ध है। 1932 में निम्नलिखित दस देशों में जन्म-दर बहुत ही कम थी :