14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अब बजट की बात करें। मैं बजट में निहित विभिन्न मदों की तफसील के संबंध में कुछ नहीं कहना चाहता हूं। ऐसा करने में काफी समय लग जाएगा और यह सामान्य बहस के दौरान खर्चे का ब्यौरा देने का उपयुक्त अवसर भी नहीं है। मैं बजट के सामान्य पहलू तक ही सीमित रहना चाहता हूं। हमारे सम्मुख जो प्रमुख समस्याएं हैं तथा वित्त मंत्री महोदय द्वारा इन समस्याओं के समाधान के लिए किए गए उपायों के बारे में ही मैं बात करूंगा। पहली बात यह देखने की है कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के इस बजट में 1,16,67,000 रुपए की नई मदें जोड़ी गई हैं। प्रश्न यह है कि क्या यह वास्तव में हमारी गतिविधियों के विस्तार को दर्शाता है? महोदय! हमें इस राशि में से 48,11,000 रुपए की कटौती करनी चाहिए। जैसा कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया है, खर्च की यह राशि अनावर्ती है, अर्थात् यह उन अस्थायी मदों पर व्यय करने के लिए है, जिनकी इस समय हमें आवश्यकता है। यह सामाजिक सेवाओं की उन कमियों को स्थायी रूप से पूरी करने के लिए नहीं है, जिन्हें पूरा करना सरकार का कर्त्तव्य है। इस तरह कुल 1,16,00,000 रुपए की राशि में से 48 लाख रुपए घटाने पर हमें शेष 68,56,000 रुपए की राशि प्राप्त होती है। इसलिए मेरा कहना है कि अगर सही अनुमान प्रस्तुत किया जाए, तो प्रेसिडेंसी में सामाजिक सेवाओं के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित खर्च में स्थायी वृद्धि वास्तव में 1,16,00,000 रुपए नहीं है, बल्कि यह राशि मात्र 68,56,000 रुपए है। मेरे द्वारा प्रस्तुत अनुमानित राशि में से आपको मद्यनिषेध के कारण और भी कटौती करनी होगी और वह कटौती 31,45,000 रुपए की होगी। यह केवल नकारात्मक बात है। इससे प्रांत की आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई सकारात्मक वृद्धि नहीं होती। इससे केवल इतना होगा कि सरकार को होने वाली आय से हाथ धोने पड़ेंगे। इसलिए अंततः हमारे वास्तविक स्थायी खर्च के लिए बजट में मात्र 37,11,000 रुपए का प्रबंध है। सदन के कई सदस्य जानते हैं कि सरकार 37,11,000 रुपयों की राशि का वितरण कैसे करेगी। एक स्पष्ट मद है शिक्षा, जिस पर 29 लाख रुपए खर्च होंगे और यह आवर्ती खर्च होगा। लघु सिंचाई योजनाओं पर 3,50,000 रुपए खर्च होंगे और यह भी आवर्ती खर्च होगा। शेष अन्य अनावर्ती मदें हैं — ग्राम पंचायतें, गांव के
खाली रकबे, चिकित्सा राहत, कुनैन, आयुर्वेदिक शिक्षा। कहने का तात्पर्य यह है कि यह वर्ष के लिए केवल कामचलाऊ व्यवस्था होगी। महोदय! मैंने बजट का जिस प्रकार उल्लेख किया है, यदि उसी रूप में इसे लें, और मेरा तो कहना है कि बजट को उसी रूप में लेना चाहिए, तो वास्तव में प्रश्न यह उठता है कि क्या इस सरकार को बधाई दी जाए, जिसने वास्तव में सदन के सामने 37,11,000 रुपए की तुच्छ मांग प्रस्तुत की है? महोदय! प्रेसिडेंसी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रेसिडेंसी में निरक्षरता, मलेरिया, गनोरिया, सिफलिस तथा अन्य बीमारियों की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए मुझे यह पूछने में तनिक भी संकोच नहीं है कि क्या सरकार अपना उत्तरदायित्व ठीक प्रकार से निभा रही है कि उसने मात्र 37,11,000 रुपए का बजट पेश किया है? मेरे मित्र महोदय मेरी बातों पर हंस रहे हैं। उन्हें हंसने से कौन रोक सकता है? इसके