296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अनेक देश घनी आबादी वाले देश हैं। इन देशों से आए हुए उत्प्रवासियों के लिए पर्याप्त स्थान जुटाना संभव नहीं है।
इस संबंध में एक और भी बात उल्लेखनीय है। उत्प्रवास, स्थायी रूप से किसी भी देश की जनसंख्या समस्या का समाधान नहीं कर सकता है। हवा के समान, बढ़ती जनसंख्या की भी रिक्त स्थान को तुरंत भरने की प्रवृत्ति होती है, जो पूर्व स्थिति की पुनरावृत्ति की ओर ही ले जाती है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि जन्म-नियंत्रण के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है।
कुछ लोग यह मानते हैं कि जब बाल-विवाह बंद हो जाएंगे और वयस्क विवाह होने लगेंगे, तब जनसंख्या पर रोक लगेगी। किंतु यह धारणा भी निराधार ही है। सर्वप्रथम, अपने देश में लड़कियों के विवाह की उम्र को पर्याप्त रूप से बढ़ाने में कई वर्ष बीत जाएंगे। लड़कियों में सबसे अधिक प्रजनन-क्षमता 18 से 22 वर्ष की उम्र में होती है। पाश्चात्य देशों में, लड़कियों का विवाह इस अवधि के बाद होता है। यानि वे तब विवाह करती हैं, जब उनका सबसे अधिक प्रजनन-क्षमता वाला समय समाप्त हो जाता है। लड़की की शादी की उम्र 14 वर्ष निर्धारित करने से संबंधित शारदा एक्ट को लागू करने में हमें जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, उससे हम आसानी से समझ सकते हैं कि यह आशा करना व्यर्थ है कि हमारे देश में स्त्रियां निकट भविष्य में 22 वर्ष की उम्र तक शादी स्थगित कर देंगी और जनसंख्या नियंत्रित की जा सकेगी। 1931 की जनगणना के साथ विशेष रूप से प्रजनन जांच के संबंध में श्री पी.के. वाटल ने जो निष्कर्ष निकाले हैं, वे इस प्रकार हैं :
(1) बीस वर्ष से अधिक उम्र में ब्याही जाने वाली लड़कियों की अपेक्षा बीस वर्ष
से कम उम्र में ब्याही जाने वाली लड़कियां कम बच्चे पैदा करती है।
(2) बीस वर्ष से अधिक उम्र में ब्याही गई मां के बच्चों की तुलना में बीस वर्ष
से कम उम्र में ब्याही गई मां के बच्चों की जीवित रहने की दर बहुत ही कम
होती है।
इन निष्कर्षों से हमें पता चलता है कि सामान्यतया वयस्क विवाह के प्रचलित होने पर भी पर्याप्त मात्रा में जनसंख्या नियंत्रित किए जाने की कोई संभावना नहीं है। बहुत से बच्चे प्रौढ़ अवस्था तक जीवित रहेंगे, इसलिए हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर में कमी के बजाए वृद्धि की ही अधिक संभावना है। जर्नल ऑफ द यूनीवर्सिटी ऑफ बोंबे (अंक 3, मई 1934) में छपे आलेख ‘फर्टीलिटी - डाटा ऑफ द इंडियन सेन्सस आफ 1931’ में बंबई विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. जी. एस. घुर्ये ने लिखा है :
प्रजनन और लड़की के विवाह के बीच के सह-संबंध का उपरोक्त अस्थायी निष्कर्ष
अगर सही साबित होता है, तो लड़की की वैवाहिक आयु में वृद्धि के साथ-जो
आवश्यक भी है-वैवाहिक प्रजनन में भी वृद्धि होगी। मैं मानता हूं कि वैसे ही