300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
बताते हैं कि पश्चिमी यूरोपीय मानदंड के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के भरण-पोषण के लिए ढाई एकड़ कृषि योग्य भूमि पर लोगों को निर्वाह करना पड़ता है। भारत में तो प्रत्येक व्यक्ति के लिए कृषि योग्य भूमि के एक एकड़ का तिहाई भाग ही है और जैसा कि पहले बताया गया है, रायल कमीशन ऑफ एग्रीकल्चर के मतानुसार, इस देश में अत्यधिक बंजर भूमि व्यावहारिक रूप से बेकार है।
यह विचार कि रासायनिक उर्वरकों के आगमन से उर्वरक-समस्या हल हो गई है, सही नहीं है। सभी स्थानों पर कृत्रिम उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
बंबई सरकार के सेवानिवृत्त एक कृषि केमिस्ट राव बहादुर डी.एल. सहस्रबुद्धे, एम. एजी, एम.एस-सी. ने अक्तूबर 1936 के सहयाद्री के अपने आलेख में यह लिखा है :
अनुभव यह दर्शाता है कि सभी स्थानों पर कृत्रिम उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। रासायनिक उर्वरकों के साथ प्राकृतिक उर्वरक जैसे गाय आदि के गोबर का भी प्रयोग होना चाहिए, अन्यथा ये कृत्रिम उर्वरक फसल के अनुकूल साबित नहीं होंगे। इसी प्रकार ऐसी फसलों को जिनमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है : उनको नुकसान से बचाने के लिए, पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना चाहिए।
इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नाइट्रेट और फास्फेट ये दो मुख्य उर्वरक हैं और इनमें से एक का उपयोग दूसरे के बिना बेकार है। फास्फेट की आपूर्ति भी बहुत सीमित है। सर फ्रेडरिक कीबल ने कहा है : ‘संसार की प्रायः सारी भूमि में फास्फेट की कमी है।“ (फर्टीलाइजर्स एंड फूड प्रोडक्शन, 1932, पृ. 22)
प्रोफेसर आर्मस्ट्रांग ने कहा है :
क्रुक्स द्वारा नाइट्रोजन समस्या के हल ने हमें बचाने के बदले अद्वितीय फास्फेट के भंडारों को व्यय होने की गति तीव्र कर दी है और हमें विनाश के समीप पहुंचा दिया है। प्रायः सभी स्थानों पर वनों की कमी है, जिसके परिणामस्वरूप जल एवं उर्वरकों की भी कमी होती गई है।
वर्तमान कांग्रेस सरकार बंबई प्रेसिडेंसी की जनता को ऊपर उठाने का प्रयास कर रही है। (सुनिए, सुनिए)। लेकिन जब तक जन्म-नियंत्रण के द्वारा जनसंख्या-समस्या का हल नहीं ढूंढा जाता, तब तक उसके सारे प्रयास विफल ही रहेंगे।
उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अब अपनी टिप्पणी का समापन करें।
श्री पी.जे. रोहम : हां, महोदय, डॉ. राधाकमल बनर्जी ने अपनी पुस्तक फूड प्लानिंग फार हंड्रेड मिलियन में कहा है :
जब तक जनसंख्या वृद्धि पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जाती, तब तक कोई भी उपाय अस्थायी ही रहेगा, जैसा कि चीन में हुआ है, क्योंकि पृथ्वी जितना भरण-पोषण