डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा पूछे गए प्रश्न
305
कि वे स्थानीय निकायों को सलाह दें कि प्रस्ताव में दी गई सिफारिश की वांछनीयता को स्वीकार करने पर विचार करें। बंबई एवं कराची पोर्ट ट्रस्ट, बंबई सिटी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और नगर निगम से भी यह निवेदन किया गया है कि वे अपने नियंत्रण वाले सार्वजनिक स्थानों पर भी इस संकल्प को लागू करें।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या मंत्री महोदय को यह जानकारी है कि कई स्थानों पर सार्वजनिक निकायों द्वारा सार्वजनिक स्थानों का लाभ उठाने के लिए की गई व्यवस्था के बावजूद दलितों को गावों में सामान्य ग्रामीणों द्वारा रोका गया।
माननीय श्री गुलाम हुसैन : यह मेरी जानकारी में नहीं है।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 19, पृ. 546, 5 मार्च 1927)
| Col1 | Col2 | Col3 |
|---|---|---|
| ox | Col2 |
|---|---|
| d | ds |
|---|---|
| lg | k; | d | Col4 |
|---|
| 'kSf{kd | Col2 | Col3 |
|---|---|---|
| kSf{kd | kSf{kd | kSf{kd |
| kSf{kd |
| gha gSA 546] 5 fujh{kd | Col2 | Col3 | Col4 |
|---|---|---|---|
| fujh{kd | fujh{kd | fujh{kd | fujh{kd |
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
( i ) दलित वर्गों के लिए अतिरिक्त सहायक शैक्षिक निरीक्षक के पद से श्री जी.
जी. कांबले को क्यों पदावनत किया गया?
( ii ) क्या उक्त पद को समाप्त कर दिया गया है?
( iii ) यदि हां, तो क्यों?
माननीय दीवान बहादुर हरीलाल डी देसाईः उत्तर इस प्रकार है-
( i ) श्री कांबले को इसलिए पदावनत किया गया, क्योंकि वह पद पर अपने बने
रहने का औचित्य देने में असमर्थ रहे। उनकी देख-रेख में दिए गए विद्यालयों
में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ।
( ii ) हां।
( iii ) पद समाप्त कर दिया गया था क्योंकि बंबई प्राथमिक शिक्षा अधिनियम
1923 के अंतर्गत स्थानीय प्राधिकारियों को प्राथमिक विद्यालयों का नियंत्रण
हस्तांतरित कर दिए जाने से सरकार के लिए इसे और अधिक जारी रखना
अनिवार्य नहीं रह गया था।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह आवश्यक नहीं समझती है कि विशेष सहायक शैक्षिक निरीक्षक का लाभ दलित वर्ग के विद्यालयों को भी दिया जाना चाहिए?
माननीय दीवान बहादुर हरीलाल डी. देसाई : पहले उदाहरण स्वरूप सरकार ने विशेष पद की व्यवस्था की। अब सभी विद्यालय स्थानीय निकायों को हस्तांतरित कर दिए गए हैं और यदि सरकार उस प्रकार की नियुक्ति करना आवश्यक समझेगी, तो उस विषय पर पुनर्विचार करेगी।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 19, पृ. 604, 7 मार्च 1927)