306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
सिटी मजिस्ट्रेट श्री फ्लेमिंग का निर्णय
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| d | k |
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
(क) हाल के दो फौजदारी मुकदमों ( i ) साम्राज्य बनाम बाबूराव फुले और ( ii )
साम्राज्य बनाम जवलकर तथा अन्य में पूना के सिटी मजिस्ट्रेट श्री फ्लेमिंग द्वारा
दिए गए निर्णय की ओर क्या उनका ध्यान आकर्षित किया गया है? इन दोनों
मुकदमों में अभियुक्तों के ऊपर भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के अंतर्गत
अभियोग लगाए गए थे;
(ख) क्या वे लोग इससे अवगत हैं कि श्री फ्लेमिंग ने दोनों मुकदमों में शामिल
कानून के एक समान बिंदु पर परस्पर विरोधी निर्णय दिए हैं, जैसे दंड प्रक्रिया
संहिता की धारा 198 के अंतर्गत क्या फरियादी कोई सताया गया व्यक्ति है?
(ग) क्या इस संबंध में श्री फ्लेमिंग से कोई स्पष्टीकरण लिया गया है कि उन्होंने
इस तरह के परस्पर विरोधी निर्णय क्यों दिए हैं?
(घ) क्या वे इस संबंध में श्री फ्लेमिंग के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने का प्रस्ताव
रखते हैं?
माननीय श्री जे.ई.बी. हाटसन : (क) से (ख) मजिस्ट्रेट के निर्णय से स्वयं को पीडि़त समझने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कानूनी प्रावधान बने हुए हैं। इस सदन में सरकार इस प्रश्न के उन बिंदुओं पर समग्र अनौचित्य के बिना कोई विचार व्यक्त नहीं कर सकती है।
श्री एस.के. बोले : उत्तर केवल (ख) का दिया गया है, न कि (क), (ग) या (घ) का।
माननीय श्री जे.ई.बी. हाटसन : उत्तर प्रश्न के सभी चारों भागों के लिए है।
श्री एस.के. बोले : (क) में प्रश्न यह है कि ‘क्या श्री फ्लेमिंग द्वारा दिए गए निर्णय की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया गया है’, लेकिन इसके लिए कोई उत्तर नहीं दिया गया है।
माननीय श्री जे.ई.बी. हाटसन : मैं समझता हूं कि यह विवक्षित है। उनकी ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया है।
श्री एस.के. बोले : पुनः (ख) में प्रश्न यह है कि ‘क्या वे इससे अवगत हैं कि श्री फ्लेमिंग ने परस्पर विरोधी निर्णय दिए हैं’, लेकिन उसके लिए कोई उत्तर नहीं दिया गया है।
माननीय श्री जे.ई.बी. हाटसन : हां, इसका उत्तर है। ‘इस सदन में सरकार समग्र अनौचित्य के बिना कोई विचार व्यक्त नहीं कर सकती है’ इत्यादि।
श्री एस.के. बोले : जो पूछा गया है, क्या उसकी उन्हें जानकारी है?
माननीय अध्यक्ष : शब्द ‘परस्पर विरोधी’ हैं तथा उस पर विचार की मांग की