डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा पूछे गए प्रश्न
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(क) क्या वे इससे अवगत हैं कि दलित वर्ग में बहुत अधिक बेरोजगारी व्याप्त है?
(ख) छुआछूत के कारण दलितों के लिए बहुत सारे व्यवसायों के द्वार बंद हैं,
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जहां कहीं वन भूमि उपलब्ध होगी, क्या वे वहां
दलितों को स्थापित करने का विचार रखते हैं, जैसी व्यवस्था मैसूर सरकार ने
भी की है?
(ग) क्या वन भूमि के लिए वे दलित आवेदकों को वरीयता देने का विचार
रखते हैं?
माननीय श्री जी.बी. प्रधान : (क) नहीं।
(ख) खानदेश प्रभागों के तीन क्षेत्रों में इस प्रकार की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। यदि आवेदन किया जाता है और उपयुक्त वन भूमि उपलब्ध होगी, तो इस प्रकार की व्यवस्था की व्यवहार्यता पर आगे भी विचार किया जाएगा।
(ग) वन भूमि के लिए दलितों के आवेदनों पर अनुग्रहपूर्वक विचार किया जाएगा, किंतु वरीयता संबंधी कोई वादा नहीं किया जा सकता है।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 21, पृ. 269-70, 1 अक्तूबर 1927)
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
(क) क्या यह सच है कि वह दक्कन कृषक सहायता अधिनियम को निरस्त
करने के लिए विधेयक प्रस्तुत करने का विचार कर रही है?
(ख) यदि हां, तो क्या उन कृषकों के विचार जाने गए हैं, जिनके हितों को इस
प्रकार की कार्रवाई से निश्चय ही हानि होगी?
(ग) क्या उन्हें इस बात की जानकारी है कि कृषि संबंधी शाही आयोग ने अपना
मत व्यक्त किया है कि कुसीदिक (यूज्युरियस) ऋण अधिनियम, 1918 को लागू
करना सफल नहीं हो पाया है?
माननीय श्री जे. आर. मार्टिन : (क) और (ख) दक्कन कृषक सहायता अधिनियम को रोकने या सुधारने का मामला तब तक के लिए स्थगित कर दिया गया है, जब तक कि कृषि ऋण भार (एग्रीकल्चर इनडेब्टनेस) के संबंध में विधायी प्रश्न को कृषि आयोग अनुमोदित नहीं कर देता है। इसके बाद उसे समग्र रूप में लिया जा सकता है। (ग) हां।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 24, पृ. 287, 29 सितंबर 1928)
सरकारी कर्मचारी : वेतन और पेंशन
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —