316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
उसके द्वारा 1927-28 (या पूर्व के किसी अन्य वर्ष के जिसके आंकड़े उपलब्ध
हैं) दी गई कुल राशि कितनी थी —
( i ) अधीनस्थ और लिपिकीय सेवाओं में कार्यरत अपने स्थायी कर्मचारियों के
वेतन के रूप में?
( ii ) अपने अधीनस्थ और लिपिकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन
के रूप में;
माननीय श्री जी.बी. प्रधान : ( i ) स्थायी और अस्थायी स्थापनाओं के खर्च के आंकड़े अलग-अलग उपलब्ध नहीं हैं। 1925-26 के दौरान प्रांतीय सरकार की अधीनस्थ स्थापनाओं के वेतन पर खर्च की कुल राशि 296 लाख रुपये थी। इसमें श्रमजीवी कर्मचारियों का खर्च जो 25 लाख रुपये के लगभग है, नहीं जोड़ा गया है।
( ii ) सरकार को खेद है कि वह विभिन्न श्रेणियों के अपेक्षित आंकड़े अलग-अलग उपलब्ध न होने के कारण इन्हें प्रस्तुत करने में असमर्थ है।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 24, पृ. 287, 29 सितंबर 1928)
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ओर से डॉ. पी.जी. सोलंकी : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
(क) क्या यह सच है कि बंबई नगर में स्नातकों के प्रारंभिक वेतन की जानकारी
हेतु डॉ. एस.के. बोले ने परिषद में प्रश्न उठाया था?
(ख) क्या सह सच है कि सरकार ने उत्तर दिया है कि जहां स्थापनाएं ‘उच्च’
और ‘निम्न स्तर’ में बंटी हुई हैं, वहां स्नातकों का प्रारंभिक वेतन 90 रुपये
प्रतिमाह कर दिया गया है, उन कार्यालयों में निम्न स्तर पर सेवारत स्नातकों
को छोड़कर। सरकार ने एक सरकारी संकल्प, वित्त विभाग सं. 1140, 25 मार्च
1925 भी विभागाध्यक्षों को तदनुसार निर्देशों सहित जारी किया?
(ग) क्या सह सच है कि उपरोक्त सरकारी संकल्प जो सभी विभागाध्यक्षों को
निर्देश देता है कि वे बंबई नगर में स्नातकों को 90 रुपये प्रारंभिक वेतन दें, के
बावजूद बंबई नगर का कलक्टर अपने अधीन विभागों में स्नातकों को केवल 60
रुपये प्रारंभिक वेतन देता है, जबकि उन विभागों में कोई उच्च और निम्न स्तर
का विभाजन भी नहीं है?
(घ) क्या सरकार इससे अवगत है कि छोटे शहरों में स्नातकों को केवल 70
रुपये प्रारंभिक वेतन दिया जाता है?
माननीय श्री जी.बी. प्रधान : (क) हां।