डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा पूछे गए प्रश्न
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(ख) सरकार ने उत्तर दिया कि निम्न स्तर पर सेवारत स्नातकों को छोड़कर, उन कार्यालयों में जिनमें स्थापना उच्च और निम्न स्तर में बंटी हुई हैं बंबई के सभी कार्यालय प्रमुखों को, सभी स्नातकों को 90 रुपये प्रारंभिक वेतन देने के लिए प्राधिकृत किया गया था। इस आशय के आदेश सरकारी संकल्प, वित्त विभाग सं. 1140, 25 मार्च 1925 में जारी किए गए थे।
(ग) माननीय सदस्य द्वारा सांकेतिक आदेशों के अधीन सरकार ने अपने कार्यालय प्रमुखों को संशोधित समय-मान (टाइम स्केल) के तहत उन कार्यालयों के स्नातकों को 90 रुपये प्रतिमाह प्रारंभिक वेतन देने के लिए प्राधिकृत किया था, जहां स्थापना उच्च और निम्न वेतनमानों में बंटी हुई नहीं है। उपरोक्त आदेशों के अनुसार बंबई के कलक्टर, जहां स्नातक लिपिक परमावश्यक लगता है, केवल ऐसे स्नातक को ही 90 रुपये प्रतिमाह प्रारंभिक वेतन देता है। अन्य मामलों में स्नातकों को सौंपे गए कार्य की महत्ता के अनुसार उनकी वेतन दर 60 से 90 रुपये है।
(घ) हां।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 25, पृ. 685, 28 फरवरी 1929)
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ओर से डॉ. पी.जी. सोलंकी : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
(क) जिला पूना, तालुक हवेली के मोहरी और बड़गांव के महारों की भूमि क्या
सरकार ने मुल्शी बांध के कारण अधिग्रहीत कर ली थी?
(ख) किस दर पर भूमि का अधिग्रहण किया गया था?
(ग) क्या इन गांवों के महारों को भूमि का मूल्य दे दिया गया था?
माननीय श्री जे.एल. रियू : (क) हां।
(ख) जिरैत भूमि के लिए 50 रुपये प्रति एकड़ और गादी (धान) भूमि के लिए 550 रुपये प्रति एकड़।
(ग) इनामी भूमि का मूल्य सरकार के खाते में जमा कराया गया था एवं मुआवजे की कुल राशि का पांच प्रतिशत वार्षिक नगद भत्ते के रूप में महार वतनदार के लिए स्वीकृत किया गया था।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 25, पृ. 767, 1 मार्च 1927)
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स्थानीय बोर्डों को सहायता
डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ओर से डॉ. पी.जी. सोलंकी : क्या सरकार यह बताने