318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
की कृपा करेगी कि —
(क) क्या यह सच है कि निदेशक, सार्वजनिक अनुदेश ने लगभग तीन साल से
स्थानीय बोर्डों के अनुदान का मामला लंबित रखा हुआ है?
(ख) यदि हां, तो विलंब के लिए कौन उत्तरदायी है?
(ग) यदि सरकार इस विषय में कोई कार्रवाई करने का विचार कर रही है तो वह क्या
है?
माननीय मौलवी रफीउद्दीन अहमद : (क) यदि माननीय सदस्य प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकार द्वारा दिए गए अनुदानों को देखें, तो पता चलेगा कि जिला स्थानीय बोर्डों या स्थानीय प्राधिकारियों को लेखा परीक्षा के बाद दिया जाने वाला वार्षिक अंतिम अनुदान प्रायः वास्तविक राशि की अपेक्षा अधिक ही रहा है। लेखा आपत्तियों के पश्चात् इन वार्षिक अनुदानों का अंतिम रूप से समायोजन किया जाता है।
(ख) प्रश्न ही नहीं उठता है।
(ग) वर्तमान कार्य-प्रणाली में परिवर्तन का कोई विचार नहीं किया गया है।
(बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 25, पृ. 1092, 7 मार्च 1929)
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : क्या सरकार यह बताने की कृपा करेगी कि —
(क) क्या यह सच है कि बंबई नगरनिगम ने विगत 15 वर्षों में मोरलैंड रोड का
एक बार भी पुनः निर्माण नहीं किया है। यदि हां, तो उसके कारण क्या हैं?
(ख) क्या सरकार इस विषय में कोई कदम उठाने का कोई विचार करती है?
(ग) क्या यह सच है कि इस मामले को अध्यावेदनों एवं प्रेस के माध्यम से पुलिस
अधिकारियों एवं नगरनिगम के समक्ष प्रस्तुत किया गया?
माननीय दीवान बहादुर हरीलाल डी. देसाई : (क) यह सच नहीं है कि विगत 15 सालों से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है। 1914 से 1921 की अवधि के दौरान नियमित रूप से पूरी सड़क की मरम्मत का कार्य किया गया था और 1920-21 के दौरान पूरी सड़क की मरम्मत की गई तथा 11,640-15-3 रुपये की लागत से सड़क की सतह पर तारकोल बिछाकर इसे सुधारा गया। यद्यपि 1922 से सड़क की पर्याप्त मरम्मत नहीं की गई तथापि इसकी सतह की मरम्मत बार-बार की गई है। नगरनिगम ने सीमेंट की ठोस नींव पर डामर (आसफाल्ट) चादर के साथ सड़क के पुनर्निर्माण की अनुमति दी है और यथासमय कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
(ख) नहीं।