परिशिष्ट III
विश्वविद्यालय सुधार समिति
(देखें अध्याय 4, पृष्ठ 66)
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(बंबई विश्वविद्यालय के सुधार की समस्याओं की जांच हेतु बंबई सरकार ने एक समिति नियुक्त की थी। इस समिति के 13 सदस्य थे, जिसके अध्यक्ष चिमन लाल एच. शीतलवाड थे। डॉ. अम्बेडकर इस समिति के सदस्य नहीं थे, किंतु वे उन 321 व्यक्तियों में से एक थे जिनके पास समिति ने 54 प्रश्नों वाली अपनी प्रश्नावली भेजी थी। डॉ. अम्बेडकर ने मात्र उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दिया, जिन्हें उत्तर देने योग्य समझा। केवल डॉ. अम्बेडकर द्वारा उत्तरित प्रश्न ही यहां साक्ष्यों सहित पुनः प्रस्तुत किए जा रहे हैं — संपादक)।
आपके विचार में बंबई प्रेसिडेंसी में विश्वविद्यालय शिक्षा का लक्ष्य एवं कार्य क्या होना चाहिए? क्या आप समझते हैं कि इस प्रेसिडेंसी में विश्वविद्यालय शिक्षा की वर्तमान पद्धति यहां के युवा भारतीयों को लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान कर सकती है। यदि नहीं, तो किन प्रमुख मदों के कारण आप वर्तमान पद्धति को त्रुटिपूर्ण मानते हैं?
क्या आप समझते हैं कि आपके द्वारा बताई गई कमियां मुख्य रूप से विद्यमान हैं, या संभावित हैं। (क) गुरु-शिष्य परंपरा, (ख) विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के प्रवेश से पूर्व शिक्षा की दशा या (ग) विश्वविद्यालय की प्रशासनिक या शैक्षिक कार्यप्रणाली?
आपके विचार से विश्वविद्यालय ने कहां तक इस प्रेसिडेंसी में समुदायों के इतिहास और संस्कृति के ज्ञान को पारस्परिक हित में और सद्भावना के लिए बढ़ावा दिया है? क्या आप कुछ ऐसे उपाय सुझाएंगे, जिनके द्वारा इस भावना को विकसित किया जा सके?
* 1925-26 में सरकार द्वारा नियुक्त विश्वविद्यालय सुधार समिति की रिपोर्ट, पृ. 226-31