III. विश्वविद्यालय सुधार समिति - Page 343

326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

गिरने न पाए?

  1. आप इस प्रांत की मातृभाषाओं के वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने की सर्वोत्तम विधि और मातृभाषा में सभी प्रकार के साहित्य के प्रस्तुतीकरण को बढ़ावा देने के बारे में क्या सोचते हैं?

  2. क्या आप किसी विशेष समुदाय में विश्वविद्यालय-शिक्षा के प्रचार हेतु कोई विशेष उपाय करना चाहेंगे?

डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा लिखित साक्ष्य

(प्रश्न-1) : मैं इंग्लैंड में शिक्षा मंडल के निरीक्षकों के इस मंतव्य से सहमत हूं कि विश्वविद्यालय-शिक्षा का उद्देश्य व कार्य ऐसे होने चाहिएं, जिनसे पता चले कि वहां दी जाने वाली शिक्षा वयस्कों के लिए उपयुक्त है, कि यह अपने चरित्र में वैज्ञानिक, निष्काम और पक्षपात रहित हो, कि इसका उद्देश्य विद्यार्थी के मस्तिष्क में केवल तथ्य और सिद्धांतों को भरना नहीं होना चाहिए अपितु उसके व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति को सुदृढ़ करने वाला होना चाहिए, कि यह विद्यार्थी को प्रधान सत्ताधारी के समीक्षात्मक अध्ययन का आदी बनाती है तथा उसके मस्तिष्क में एक संपूर्णता का स्तर बनाती है, और उसे कठिनाई की दिशा से जूझते हुए सत्य तक पहुंचने का अर्थ देती है। इस प्रकार प्रशिक्षित विद्यार्थी यह अंतर करना सीख जाता है कि सही ढंग से तथ्यपूर्ण मामला क्या है और मात्र विचारपूर्ण मामला क्या है। उसे मूल प्रश्नों के विभेद की जानकारी आनी चाहिए और बिना किसी पूर्व प्रचलित सिद्धांत के प्रत्येक प्रश्न को गुणों के अनुसार जानने की क्षमता पैदा होनी चाहिए। उसे सही व सहानुभूतिपूर्वक ढंग से उन बातों को जानना चाहिए जिनके बारे में व्यावहारिक निष्कर्षों को वह तीव्रतापूर्वक विरोध करता रहा है। उसमें किसी सुझाई गई बात के परीक्षण की योग्यता होनी चाहिए और उसे त्यागने और स्वीकार करने से पहले उसके प्रतिफल को जानना चाहिए। अनिवार्यतः एक मौलिक विद्यार्थी बनने के बजाए उसे उन स्थितियों के प्रति अंतर्दृष्टि प्राप्त हो जानी चाहिए जिनमें मौलिक अनुसंधान किया जा रहा है। उसे तथ्यों को पहचानना आना चाहिए, उनका अनुगमन करना और तर्क-वितर्क के आधार पर विवेचना करना तथा अपनी नैतिकता स्थापित करना आना चाहिए।

मुझे इस बात का कोई कारण नजर नहीं आता कि बंबई प्रांत में विश्वविद्यालय शिक्षा का उद्देश्य और कार्य भिन्न-भिन्न क्यों हो? विद्यार्थियों के गुण के आधार पर ये बनते हैं और यह कहा जाना चाहिए कि इस प्रांत में विश्वविद्यालय शिक्षण की वर्तमान पद्धति विश्वविद्यालय शिक्षा के उद्देश्य और कार्यों को चरितार्थ करने में पूरी तरह से असफल रही है।

प्रश्न 2 : संभव है इस असफलता के पीछे थोड़ा अनुदेशकों का उत्साह और