विश्वविद्यालय सुधार समिति
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पद्धतियां, थोड़े शिष्य और थोड़ी वह शिक्षा जिम्मेदार है, जो विश्वविद्यालय आने से पूर्व विद्यार्थी पाते हैं। मेरे विचार में, असफलता का मुख्य कारण विश्वविद्यालय का प्रशासनिक एवं शैक्षिक ढांचा है। इससे पहले कि एक विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय-शिक्षा के उद्देश्य और कार्यों को पूरा करने की स्थिति में आए, उसका प्रबंध इस प्रकार होना चाहिए कि वह वास्तव में एक ऐसी ज्ञान-स्थली बन सके जहां विद्वतजनों का मनुष्यों के प्रशिक्षण के लिए और ज्ञान की उन्नति और विस्तार हेतु साहचर्य भाव से परिश्रम करे। इन अभ्युक्तियों के प्रकाश में यह कहना स्पष्ट होगा कि बंबई विश्वविद्यालय सही मायने में विश्वविद्यालय नहीं है। यह विद्वतजनों का संघ नहीं है। यह मनुष्य को दीक्षित नहीं करता और यह प्रत्यक्षतः ज्ञान की उन्नति और विस्तार में रुचि नहीं लेता है। दूसरी ओर बंबई विश्वविद्यालय अपने प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे के कारण एक ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, जैसा उसे नहीं होना चाहिए। यह प्रशासकों का संघ हो गया है। यह बस उम्मीदवारों की परीक्षा से संबंधित है, जबकि ज्ञान की उन्नति और विस्तार इसकी रुचि-क्षेत्र से बाहर हैं।
प्रश्न 3 : बंबई विश्वविद्यालय ने इस प्रांत में विविध समुदायों में इतिहास और संस्कृति के लिए परस्पर प्रेम और सहानुभूति के ज्ञान का प्रचार नहीं किया है। केवल परीक्षा लेने वाला विश्वविद्यालय, जो इस बात से कोई संबंध नहीं रखता कि ज्ञान के प्रति प्रेम उत्पन्न हो, इस उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता और मुझे ऐसा लगता है कि सफलता का एक ही मार्ग है और वह यह कि सबसे पहले इस विश्वविद्यालय को एक शिक्षण विश्वविद्यालय में परिवर्तित करें।
प्रश्न 4-7 : मैं स्वयं को इन प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देने की स्थिति में नहीं पाता हूं। मैं स्वीकार करता हूं कि विश्वविद्यालय का स्तर बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उच्च विद्यालयों से उसे किस प्रकार की ‘सामग्री’ प्राप्त होती है। सही स्तर की मानसिकता पाना प्रत्येक विश्वविद्यालय की समस्या है। पर मैं यह नहीं समझ सकता हूं कि एक विश्वविद्यालय को उच्च विद्यालयों की शिक्षा पद्धति का नियमन करने का अधिकार क्यों प्राप्त हो, ताकि वह उनमें आने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्तर को कायम कर सकें। मुझे एक भी ऐसे विश्वविद्यालय का पता नहीं है, जिसने इस उत्तरदायित्व को लिया हो। सभी विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं, जहां वे अपने परीक्षा पत्रों द्वारा अपेक्षित विद्यार्थियों का चयन करते हैं। मैं नहीं समझता कि बंबई विश्वविद्यालय को इससे अधिक और क्या करने के लिए कहा जाए।
प्रश्न 8-10 : मेरे विचार में बंबई विश्वविद्यालय को एक शिक्षण विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने के किसी भी प्रयास में दो भिन्न समस्याएं आएंगी। वे हैं (1) इसे एक शिक्षण विश्वविद्यालय में कैसे बदला जाए और (2) इसके शिक्षण की व्यवस्था कैसे हो? पहली समस्या पर मैं तब विचार करूंगा जब प्रश्न 30-40 पर आऊंगा। यहां मैं