विश्वविद्यालय सुधार समिति
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प्रश्न 25 : विश्वविद्यालय शिक्षा को संयोजित करने से संबंधित मेरी योजना केवल उन केंद्रो के लिए लागू होती है, जहां महाविद्यालय बहुत ही निकट स्थित हों। यदि इस योजना को बड़े स्तर पर लागू किया गया, तो पहला काम यह करना होगा कि महाविद्यालय पास-पास स्थापित करके उनकी स्थिति को नियंत्रित किया जाए। दूसरे शब्दों में, यह आवश्यक है कि महत्त्वाकांक्षी शिक्षाविदों को सभी प्रकार से अविकसित शहरों में व्यक्तिगत स्वायत्त महाविद्यालय खोलने से रोका जाए। जब कोई ऐसे अलग और बिखरे महाविद्यालयों को अस्तित्व में बनाए रखने से होने वाले अपव्यय, दोहराव और मूर्खतापूर्ण मनोरंजन की बात करता है, तब हमें आश्चर्य होता है कि ऐसी अराजक स्थिति को अब तक बर्दाश्त किया गया। मैं बंबई प्रांत के लिए इसे बहुत सौभाग्यशाली मानता हूं कि इन अलग-अलग महाविद्यालयों की वृद्धि अब तक उस तरह से और उस स्तर पर नहीं हो पाई है, जैसे बंगाल में। किंतु यदि विश्वविद्यालय शिक्षा का स्तर बनाए रखना है, तो बिखरे हुए महाविद्यालयों की स्थापना को समाप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। इस उद्देश्य के लिए मैं इस प्रांत में विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्रों का निर्धारण करूंगा और किसी अन्य स्थान पर किसी भी महाविद्यालय के खोलने की अनुमति नहीं दूंगा। मेरे विचार में निम्नलिखित स्थान विश्वविद्यालय शिक्षा के वास्तविक या संभावित केंद्रों के रूप में चिन्हित किए जाने चाहिए :
बंबई 1 6. हैदराबाद (संभावनाशील)
पूना 1 7. धारवाड़ (संभावनाशील)
अहमदाबाद 1 8. सांगली (संभावनाशील)
सूरत (संभावनाशील) 1 9. नासिक (संभावनाशील)
कराची 10. अमालनेर (संभावनाशील)
विश्वविद्यालय शिक्षा केन्द्रों के रूप में परिभाषित होने के पश्चात् दूसरा कार्य यह होगा कि उन स्थानों पर शिक्षण की व्यवस्था हो। उपरोक्त अधिकांश विश्वविद्यालय केंद्रों में अब तक केवल एक ही महाविद्यालय है, जो कला विषयक शिक्षा दे रहा है। केवल बंबई और पूना में निकट साहचर्य में महाविद्यालय स्थित हैं। वहां विश्वविद्यालय शिक्षा की समस्या विभागों में अलग-अलग महाविद्यालयों के शिक्षकों के क्रम-परिवर्तन और मिलान द्वारा आसानी से सुलझाई जा सकती है।
जिन केंद्रों पर अभी तक केवल एक-एक ही महाविद्यालय है, वहां विश्वविद्यालय की शिक्षा संबंधी समस्या दो तरह से सुलझाई जा सकती है (1) एक विशेष विषय के शिक्षण के लिए वर्तमान महाविद्यालय के समीप ही नए महाविद्यालय खोलने की अनुमति देकर या (2) वर्तमान महाविद्यालय को एक विश्वविद्यालय मानकर और इसे अध्ययन के नए विभाग खोलने की अनुमति देकर। पहली योजना अधिक सफल लगती है। किंतु दूसरी योजना कार्यक्षमता के आधार पर अधिक आकर्षक होगी। प्रांत के