III. विश्वविद्यालय सुधार समिति - Page 354

विश्वविद्यालय सुधार समिति

337

के लिए अनुपयुक्त है। जबकि वे कई बार इस जड़ परीक्षा पद्धति को केवल मात्र एक आधार नहीं मानते और दूसरी पद्धति से बहुत योग्य तथा बुद्धिमान शिक्षकों के उस अस्तित्व को महत्त्व देते हैं, जिनसे अन्य विभाग पूरी तरह से समृद्ध हो सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है, उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर को बनाए रखने के लिए शिक्षक और शिष्य के स्तर को बनाए रखना बहुत आवश्यक नहीं समझा और अब जब कि बंबई विश्वविद्यालय को एक शैक्षिक विश्वविद्यालय में बदलने की बात हो रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए कि ‘शिक्षण नियंत्रण की शक्ति जांच के उपरांत उपाधियां देने की शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है।’

एक विश्वविद्यालय शैक्षिक विश्वविद्यालय तब तक नहीं बन सकता, जब तक कि शैक्षिक कार्य, यथा शिक्षण और परीक्षा उसके अधिकार क्षेत्र में न हों, जो शिक्षण से संबद्ध हैं। किंतु यह विश्वविद्यालय उपाधि के स्तर हेतु घातक होगा, यदि वह उन शिक्षकों पर निर्भर करे, जिनकी क्षमता पर उसे स्वयं ही विश्वास नहीं है। इसलिए मैं यह प्रस्तावित करता हूं कि विश्वविद्यालय को महाविद्यालयों के ऊपर पूरा अधिकार होना चाहिए। महाविद्यालयों को सभी सरकारी अनुदान विश्वविद्यालय के माध्यम से ही मिलने चाहिएं, जिससे विश्वविद्यालय के पास शिक्षकों की नियुक्ति और पुस्तकालयों तथा प्रयोगशालाओं के लिए सामान खरीदने की दृष्टि से अधिकार होने चाहिएं।

प्रश्न 36 - 39 : यदि एक विश्वविद्यालय को शैक्षिक संगठन के रूप में अपने समाज की सेवा करनी है तब उसके संविधान में (क) एक ऐसे निकाय जो समाज की सब प्रकार की अपेक्षाओं को ध्यान में रखे; (ख) एक ऐसे निकाय, जो विश्वविद्यालय की समस्त शैक्षिक स्थितियों और काम करने की क्षमता को बढ़ावा दे सके, जिससे जनता और विद्वानों के बीच कोई संकुचित दृष्टिकोण न रहने पाए; और (ग) एक ऐसे निकाय, जहां विद्वानों का वर्ग अपने शिक्षण कार्य में लग सके और जो विश्वविद्यालय के शैक्षिक स्तर को आधिकारिक रूप से दिशा-निर्देश दे सके; का प्रावधान अवश्य होना चाहिए।

मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह समिति देखे कि एक विश्वविद्यालय तब तक एक शैक्षिक विश्वविद्यालय नहीं बन सकता, जब तक कि वह केवल अपने शिक्षकों द्वारा मात्र शिक्षण कार्य करता है। यह एक शैक्षिक विश्वविद्यालय का स्वरूप नहीं है। एक विश्वविद्यालय शिक्षण देने के बावजूद एक शैक्षिक विश्वविद्यालय नहीं बन पाता। एक विश्वविद्यालय शैक्षिक विश्वविद्यालय है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसके द्वारा नियुक्त विद्वान शिक्षक अपने शिक्षण कार्य में लगे हुए तत्संबंधी प्रभावी निदेशन दे सकें। यदि यह उनके अधिकार में है, तो वह विश्वविद्यालय नहीं है। एक शैक्षिक विश्वविद्यालय शिक्षकों का विश्वविद्यालय होता है।

मुझे ये प्रारंभिक टिप्पणियां इसलिए करनी पड़ीं क्योंकि मैं अनुभव करता हूं कि समिति संविधान संबंधी उन प्रश्नों के उत्तर चाहती है, जिनसे वह उन सुझावों पर