III. विश्वविद्यालय सुधार समिति - Page 358

विश्वविद्यालय सुधार समिति

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रही है। इसलिए मेरा यह प्रस्ताव है कि लेखामंडल को समाप्त किया जाए तथा इसके कार्य सिंडीकेट को हस्तांतरित कर दिए जाएं, जिसे निम्नलिखित बातें निर्धारित करने का अधिकार होगा —

(1) विश्वविद्यालय का वित्त, निवेश एवं लेखा।

(2) विश्वविद्यालय में वसूल की जाने वाली विश्वविद्यालय से प्राप्त विशेष सुविधा

के उपभोग संबंधी राशि और शुल्क का भुगतान।

(3) आचार्य, शिक्षक, कुलसचिव, पुस्तकालयाध्यक्ष और स्थायी कर्मचारियों सहित

विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों की नियुक्ति, पदावधि एवं कार्यालय से

निष्कासन, कर्तव्य, परिलब्धियां, भत्ते, वेतन एवं सेवानिवृत्ति, भत्ते की शर्तें

एवं रीति।

(4) कर निर्धारकों, परीक्षकों व परीक्षा मंडल की पदावधि और नियुक्ति की शर्तें

एवं रीति।

(5) अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति, पुरस्कार, पारितोषिक, धन संबंधी तथा सहायता के

अन्य प्रावधान एवं अवधि।

(6) विद्यार्थियों के निवास हेतु भवन, छात्रावास एवं अन्य परिसर का प्रबंध,

रख-रखाव और पर्यवेक्षण।

(7) विश्वविद्यालय के स्नातक-पूर्व के रूप में विद्यार्थियों का प्रवेश।

(8) विश्वविद्यालय की वास्तविक एवं निजी संपत्ति के लेन-देन को देखना।

(9) विश्वविद्यालय के कार्य को जारी रखने के लिए भवन, परिसर, फर्नीचर एवं

अन्य आवश्यक साधनों की व्यवस्था करना।

(10) विश्वविद्यालय के लिए धन उधार लेना और आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय

की संपत्ति को बंधक रखना।

(11) विश्वविद्यालय की ओर से संविदाओं में हिस्सा लेना, उन्हें परिवर्तित करना,

पूरा करना एवं रद्द करना।

(12) विश्वविद्यालय के ऐसे पदाधिकारी, आचार्य, शिक्षक वर्ग, स्नातक, स्नातक-पूर्व

और कर्मचारी जिन्हें सीनेट के किसी कार्य के अलावा किसी अन्य प्रकार

से दुःख पहुंचा हो, की किसी भी शिकायत पर विचार करना, निर्णय देना

और उपयुक्त समझे तो उसका सुधार करना।

(13) संबद्ध महाविद्यालयों में सरकारी अनुदान का नियमन करना।

वरिष्ठ सभा, सिंडीकेट और संकाय इन तीनों निकायों की स्थापना समाशन अधिनियम द्वारा की जानी चाहिए तथा ये तीनों परस्पर एक बड़े शैक्षिक विश्वविद्यालय के सभी आवश्यक साधनों की आपूर्ति करने में सक्षम हैं। परंतु बंबई विश्वविद्यालय के लिए एक और निकाय की आवश्यकता प्रतीत होती है, विशेषकर उस सुनिश्चित लंबे संक्रमण काल के लिए जो विश्वविद्यालय शिक्षण के केंद्र में रहने वाले मूल महाविद्यालयों के विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होने से पहले होगा और जिसके