III. विश्वविद्यालय सुधार समिति - Page 359

342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

निलंबित होने पर वे महाविद्यालय प्रांत के एक या दूसरे नए शैक्षिक विश्वविद्यालय से ही जुड़े रहेंगे। परंतु यदि इस संक्रमण काल के लिए प्रावधान बनाने की समस्या नहीं भी हो, फिर भी किसी बड़े शैक्षिक विश्वविद्यालय के प्रबंध हेतु एक चौथे निकाय की आवश्यकता अनुभव की जाती।

मेरे द्वारा प्रस्तावित संगठन की योजना न्यूनाधिक रूप में सत्ता के विभाजन सिद्धांत पर आधारित है। वैधानिक सत्ता का केंद्र वरिष्ठ सभा है। कार्यकारी सत्ता का केंद्र सिंडीकेट और शैक्षिक सत्ता का केंद्र संकाय है। किंतु यदि ये विभिन्न केंद्र शक्तियों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से बिना किसी समन्वय के करेंगे, तो इसका परिणाम विश्वविद्यालय के सर्वोत्तम हित के लिए घातक होगा। संकाय को विश्वविद्यालय संगठन के आधार रूप में लिया गया है और इसे अध्ययन पाठ्यक्रम निर्धारित करने, उसके पठन-पाठन का प्रबंध करने तथा परीक्षा संबंधी कार्यों में पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की गई है। परंतु उन सभी विषयों को नियंत्रित करने के लिए, जिनका अधिकार, स्पष्ट रूप से संकायों को नहीं सौंपा गया है; एक से अधिक संकायों को प्रभावित करने वाले मामलों का निपटान करने और एक-दूसरे संकायों के बीच विवाद खड़ा होने पर अंतिम निर्णय लेने के संबंध में; प्रावधान अवश्य बनने चाहिएं। न केवल संकायों के समन्वय हेतु एक निकाय की आवश्यकता है, अपितु सिंडीकेट एवं संकायों के समन्वय के लिए भी एक निकाय की आवश्यकता है, अन्यथा अपनी कार्यकारी शक्तियों के प्रयोग द्वारा सिंडीकेट संकायों की शैक्षणिक स्वंतत्रता में गंभीर रूप से हस्तक्षेप कर सकता है। धन पर नियंत्रण का अर्थ अंततः सभी वस्तुओं पर नियंत्रण है। इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संपूर्ण शैक्षिक वर्ग के प्रतिनिधिमंडल के साथ सलाह किए बिना सिंडीकेट ऐसा कोई भी कार्य नहीं करेगा, जिसका विश्वविद्यालय पर सीधा शैक्षिक प्रभाव पड़ता हो। इस प्रकार चाहे वह संक्रमण काल की विशिष्टता के रूप में हो अथवा विश्वविद्यालय संगठन की स्थायी विशेषता के रूप में हो, समावेशन अधिनियम में एक चौथे निकाय की स्थापना की स्पष्ट आवश्यकता है। मेरा प्रस्ताव है कि उस निकाय को विद्या परिषद के नाम से पुकारा जाए। इसके कार्य अंशतः परामर्शदात्री और अंशतः कार्यकारी होंगे।

इसके कार्यकारी क्रियाकलापों में, विनियम द्वारा निर्धारित या अन्य प्रकार से वे सभी मामले शामिल होंगे, जिनका संबंध निम्नलिखित से है —

(1) संकाय की अथवा संकायों द्वारा नियुक्त किसी भी समिति की बैठकों के

लिए आवश्यक कोरम।

(2) किसी भी शैक्षिक मामले से संबंधित निकाय या अन्य किसी विश्वविद्यालय के

साथ इस विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से गठित मंडल सहित सलाहकार

एवं अन्य मंडलों के अधिकार एवं कर्तव्य।

(3) विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली सम्मानार्थ उपाधियों और विशेष योग्यताओं