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बजट पर चर्चा

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और महत्त्वपूर्ण समस्या के प्रति जागरूक हैं, जो हम सबके समक्ष मौजूद है। वह समस्या है धन जुटाने की। वह इस सर्वोच्च समस्या से केवल परिचित ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने हमसे वायदा किया था कि वह इससे इस प्रकार निबटेंगे कि प्रेसिडेंसी के लिए न केवल अधिकाधिक साधन एकत्र करेंगे, बल्कि करों के भार को इस तरह बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा कि जो उसे सहन नहीं कर सकते, उन्हें उससे मुक्त कर दिया जाएगा, और जो सहन कर सकते हैं, उन पर कर लगाया जाएगा। मैं उनके भाषण का एक अंश उनको पढ़कर सुनाना चाहता हूं, जो उन्होंने पिछले साल दिया था। पैरा 14 में मेरे विद्वान मित्र ने कहा था :

एक माननीय सदस्य : माननीय सदस्य।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मुझे उच्च न्यायालय की आदत पड़ी हुई है, जहां हम अपने मित्रों को विद्वान कहकर संबोधित करते हैं। तो मेरे माननीय मित्र ने यह कहा था :

अंत में हम नए कराधान के मुद्दे पर आते हैं, जो अतिरिक्त वित्त जुटाने का साधन

है। इस बारे में हमारा पहला उद्देश्य वर्तमान करों के भार में आवश्यक समन्वय

करना है। पहले भू-राजस्व को लेते हैं। हमारा अंतिम उद्देश्य अलाभकारी जोतों

पर से कर को खत्म करना है, जिसमें हमारी भूमि इस समय विभाजित है। फिर

भी, शुरू में हम यह आवश्यक समझते हैं कि बड़ी कृषि आय पर श्रेणीकृत कर

लगाया जाए। वास्तविक खेती करने वालों के हाथों से संपत्ति हरण की प्रक्रिया

के कारण बहुत सी भूमि उन हाथों में पहुंच गई है, जो खेती नहीं करते हैं,

भाड़ा खाते हैं और अनुपस्थित भू-स्वामी हैं। क्या उनकी आय को, चाहे थोड़ी

हो या बहुत, कराधान से उसी प्रकार मुक्त रखा जाए या उनके कर को कम

किया जाए, जैसा जमीन पर वास्तविक खेती करने के साथ होता है? और ऐसी

बहुत सी आय है जो हस्तांतरित भूमि से होती है। इससे प्रेसिडेंसी को लगभग

70 लाख रुपए का वार्षिक घाटा होता है। इस प्रकार की आय को किस रूप में

लिया जाए, जब हम अपने खातेदारों के अधिक संपन्न लोगों पर कर लगाने का

प्रस्ताव रखते हैं? इस सदन में बैठे हुए सभी माननीय सदस्यों द्वारा ऐसे प्रश्नों

पर व्यक्त विचार सरकार को निश्चित प्रस्ताव तैयार करने में बहुत उपयोगी होंगे।

जो क्षमता रखते हैं, उनकी भूमि से प्राप्त आय पर ऊंचा कर लगाने की नीति

को अपनाने से साधन प्राप्त होंगे। हमारे विचार से उपयोग वास्तव में खेती करने

वालों के लिए भूमि कर के बोझ को सहने योग्य बनाने और उनका जीवन बदतर

बनाने के लिए किया जाएगा। उच्चतर और औचित्यपूर्ण कर योग्य कृषि आय पर

श्रेणीकृत कर के परिणाम के बारे में जांच-पड़ताल पहले ही शुरू कर दी गई है।

इसी प्रकार यह आवश्यक है कि दूसरे कर जिनसे हमें राजस्व मिलता है, उनकी

जांच दुबारा करें और उनका समंजन फिर से इस संदर्भ में करें कि उनका प्रभाव

क्षेत्र कितना है और उनका जनहित पर क्या प्रभाव पड़ता है। हम इस काम को