22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
को यह देखना चाहिए कि वह ऐसे उपायों को अपनाए, जिससे इस प्रेसिडेंसी की आय काफी बढ़ जाए और अधिसंख्य लोग सुविधाओं के साथ रहने लगें, जो सभी आधुनिक एवं सभ्य लोगों के लिए अतिआवश्यक है। समाज कल्याण की पद्धति जो अब तक यूरोपीय देशों में चलती रही है, उसके अंतर्गत सरकार अनुदान या बेरोजगारी भत्ता, प्रसूति लाभ आदि सुविधाएं देती है। इसमें एक बात पहले से ही मान ली गई है कि अधिसंख्य लोगों को इस तरह की सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है। वे गरीबी की रेखा से ऊपर हैं और बस थोड़े से ही लोग, जो या तो आर्थिक ढांचे के दुष्प्रभाव के कारण या दुर्भाग्य के कारण गरीबी की रेखा से नीचे हैं, उनको ही सरकारी मदद की आवश्यकता होती है। इसलिए यह पूरी तरह संभव है, उचित है कि यूरोप के देशों की सरकारें जनता के सामान्य आर्थिक उत्थान की समस्याओं की चिंता नहीं करती हैं। हम अपने देश में जिन समस्याओं से जूझ रहे हैं, वे बिल्कुल दूसरी तरह की हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है और मेरा ख्याल है कि इस सदन में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो मेरे इस विचार पर विवाद उत्पन्न करेगा कि हमारा देश भिखारियों और कुलियों का देश है। अपनी जनता का हम इसी तरह वर्णन कर सकते हैं। इसलिए कोई भी सार्थक सरकार इस गंभीर समस्या की उपेक्षा नहीं कर सकती।
महोदय! अब बजट प्रस्तावों की बात करें, जो हमारे सामने हैं। क्या इनमें ऐसा कोई संकेत है कि सरकार इस समस्या से परिचित है? क्या सरकार को इस बात का ध्यान है कि उसका उद्देश्य यह होना चाहिए कि राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो? राष्ट्र को अधिक लाभ हो? मुझे बजट में ऐसा कुछ भी नहीं मिला। इसमें सभी जगह एक ही बात मिलती है और मैं इस स्थिति में इसकी जांच करना चाहता हूं। सभी ने एक ही विचार प्रस्तुत किया है कि खेती करने वालों की गरीबी का कारण उन पर भू-राजस्व का भारी बोझ है। इसलिए सबका यही विचार है और मैं बिना किसी संदेह के यह कह सकता हूं कि वित्त मंत्री का भी यही विचार है कि जनता की आय को बढ़ाने के लिए भू-राजस्व के बोझ को हल्का करना होगा। महोदय! अब मैं यह कहने की स्वतंत्रता चाहता हूं कि इससे अधिक भ्रामक विचार और कुछ नहीं हो सकता। इसका आशय यह नहीं कि मैं भू-राजस्व में कटौती करने का विरोधी हूं। मैं चाहता हूं कि भू-राजस्व में कटौती कर दी जाए। मैं ऐसा करने के पक्ष में हूं। मैं ऐसा करने का आग्रह करूंगा, क्योंकि वास्तव में इस सरकार को खेती से होने वाले लाभ हड़पने का कोई अधिकार नहीं है। यह भूमि के उपयोग के लिए लगाए गए भू-राजस्व से अलग है। मुझे इस समय प्रचलित विचार को इस रूप में देखने दीजिए, जिसे इस सरकार ने अपनाया है और वह है कि सामान्य जनता को गरीबी से राहत दिलाने के लिए भू-राजस्व को खत्म या उसमें कटौती करने की आवश्यकता है। महोदय! हम इस पर विचार करके यह देखें कि इस प्रक्रिया से क्या राहत मिलेगी। हमें भू-राजस्व के रूप में कुल साढ़े तीन करोड़ रुपए मिलते हैं और प्रेसिडेंसी की जनसंख्या लगभग