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बजट पर चर्चा

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में कहें तो यह कांग्रेस की पुरानी नीति है। बस, अब उनके हाथ में सत्ता है, इसलिए जो चीजें पहले इतनी बुरी लगती थीं, अब अच्छी लग रही हैं। इसका कारण यह है कि अब उन्हें कांग्रेसी चला रहे हैं। ऐसे ही उनके मन-परिवर्तन के अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। हम जानते हैं कार्यपालिका को न्यायपालिका से अलग नहीं करने पर कांग्रेसी पहले खूब लड़ते थे। उनके अनुसार वह बहुत दमनकारी प्रणाली थी। अब वही कांग्रेसी इसका समर्थन करते हैं कि वह अत्यधिक आदर्श पद्धति थी। अब मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहूंगा, परंतु मैं इस ओर संकेत तो अवश्य करूंगा कि यह निश्चित रूप से कांग्रेसियों के घोषित विश्वास के विरुद्ध है।

अब बिजली पर शुल्क की बात करें। मैं समझता हूं कि सिद्धांततः यह बुरा कर है। मैं उनमें से ही एक हूं, जो यह विश्वास करते हैं कि बिजली के उपयोग को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दिया जाए। इसका कारण यह है कि अगर बिजली नहीं होगी तो लोग मिट्टी का तेल जलाएंगे, जिसमें से धुआं निकलता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इस धुएं को जल्दी से जल्दी रोकना चाहिए। मिट्टी के तेल के उपभोग को कम करने के लिए बिजली को अधिक से अधिक सस्ता बनाया जाए। इसलिए मेरा निवेदन है कि सामान्य सिद्धांत के रूप में यह बुरा शुल्क है। कराधान प्रस्ताव के इस अंग पर मेरी दूसरी टिप्पणी यह है कि इस कर का वितरण बहुत बुरी तरह से किया गया है। इसमें सबसे असाधारण बात यह है कि सिनेमा और थिएटरों के बिजली कर में कोई वृद्धि नहीं की गई है। महोदय! मैं सोचता हूं कि अगर किसी व्यक्ति पर कर लगाने की बात होती, तो यही सिनेमा और थिएटर ठीक रहेंगे। इसका कारण यह है कि अगर सिनेमा या थिएटर पर कर लगाया जाता है, तो उसे उपभोक्ता को ही बर्दाश्त करना होता है और इस प्रकार वह कर उन्हीं लोगों को भरना होता है, जो सिनेमा या थिएटर जाते हैं। उस स्थिति में कर आरामदेह वस्तु पर लगता। यह संभव है कि मेरा आकलन पूरी तरह सही न हो, लेकिन मुझे विश्वास है कि इस कर को परिवारों पर बांटने के बदले, जैसा कि माननीय वित्त मंत्री ने किया है, यदि वह सिनेमा और थिएटर पर कर की दर बढ़ाकर लगा देते, तो उनकी उतनी ही आय होती, जितनी वह इस कर से अपेक्षा रखते हैं। जैसा कि मैंने कहा है कि यह असाधारण काम है, क्योंकि जो कर देने में सक्षम था, उस पर कर नहीं लगाया गया। इसके अलावा और क्या किया गया है? जो लोग अभी तक 12 यूनिट से कम बिजली

खर्च कर रहे थे, अब उन्हें भी कर देना होगा। जो लोग 12 यूनिट से अधिक यूनिट बिजली खर्च करेंगे, उनके लिए कर की दर 9 पाई से बढ़ाकर 15 पाई कर दी गई है। महोदय! मुझे यह कर वितरण उपाय का औचित्य नहीं समझ आ रहा है। लोग जो 12 यूनिट से कम खर्च करते थे और उन्हें कर नहीं देना होता था, अब उन पर कर क्यों लगा दिया गया है? जो लोग अब तक 9 पाई देते थे, अब उन्हें 15 पाई क्यों देनी होगी, जबकि सिनेमा और थिएटर इस कराधान से मुक्त हैं?