26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अब कराधान की तीसरी मद को लेते हैं, वह है — संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टाम्प ड्यूटी में बढ़ोतरी, जो मेरे हिसाब से औचित्यपूर्ण नहीं है। बंबई नगर में माननीय वित्त मंत्री ने स्टाम्प ड्यूटी को साढ़े तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर देने का प्रस्ताव किया है, जो कुल मिलाकर वर्तमान आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि है। पूना और अहमदाबाद में उनका प्रस्ताव ढाई प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत कर देने का है। वह वर्तमान के आधार पर 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। दूसरे शब्दों में, जिनकी घोषणा सरकार बाद में करेगी, इस कर को डेढ़ प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत कर दिया गया है। यह 50 प्रतिशत वृद्धि है। शेष शहरों में इसे डेढ़ प्रतिशत से दो प्रतिशत कर देना है, जो सवा तैंतीस प्रतिशत वृद्धि है। मैंने वित्त विधेयक के संबंध में माननीय मंत्री का वक्तव्य पढ़ा है, जिसमें वृद्धि के उद्देश्य और कारण दिए गए हैं। मुझे कर की इस वृद्धि के लिए कोई औचित्यपूर्ण स्पष्टीकरण नहीं मिला। माननीय मंत्री ने बस इतना कहा हैः यह वांछनीय समझा गया है कि संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टाम्प ड्यूटी गांवों की अपेक्षा शहरों में अधिक होनी चाहिए। यह क्यों वांछनीय है? क्या शहरी क्षेत्र अधिक गुनाहगार हैं कि उन्हें अब तक जो स्टाम्प ड्यूटी दे रहे थे, उससे अधिक देनी पड़ेगी? हमें माननीय मंत्री से अभी तक इसका कोई उत्तर नहीं मिला है। यह मनमाने ढंग से किया हुआ काम है और बिना कोई कारण दिए बस यह कहा गया है कि कर बढ़ाना पड़ेगा।
इसके बाद हम पांचवें प्रस्ताव पर आते हैं, जो संपत्ति कर के बारे में है। यह संपूर्ण कराधान प्रस्ताव का मूल प्रश्न है। मेरे विचार से यह कई दृष्टि से आपत्तिजनक है। मेरे माननीय मित्र श्री जमनादास पहले ही इस पर अपनी एक आपत्ति बयान कर चुके हैं और वह यह है : अब सरकार कराधान के उस क्षेत्र में भी घुस रही है, जो अब तक नगरपालिकाओं का रहा है। बंबई नगरपालिका संपत्ति कर के रूप में बहुत बड़ा राजस्व प्राप्त करती है। केवल बंबई नगरपालिका ही नहीं बल्कि सभी नगरपालिकाओं को संपत्ति कर लगाने की अनुमति दी गई है। महोदय! मुझे विश्वास है कि कराधान के क्षेत्र में सरकार की नगरपालिकाओं के साथ प्रतिस्पर्धा से स्थानीय स्वायत्त शासन को गहरा धक्का लगेगा। मैं इस मुद्दे पर और अधिक नहीं कहूंगा। लेकिन मैं प्रस्ताव के कुछ अन्य पहलुओं की ओर संकेत करूंगा और पहला पहलू इस प्रकार है। बंबई नगर के किराएदार एक आंदोलन चला रहे हैं कि किराए असाधारण रूप से ज्यादा हैं और उन्हें कम किया जाए। महोदय! अब जैसा कि सरकार कराधान के इस उपाय को अपनाने जा रही है, उससे वह संपत्ति के मूल्य का 19 प्रतिशत प्राप्त करेगी। तब ऐसी स्थिति में क्या उसको मकान मालिकों से किराएदारों का किराया कम करने को नहीं कहना चाहिए, जो इस समय ऊंचे किराए के खिलाफ आंदेलन कर रहे हैं। इसलिए सरकार जो कर रही है, वह बंबई नगर के किराएदारों के साथ धोखा है। उनका अधिकार उनसे छीन रही है। यह बात अहमदाबाद और पूना के किराएदारों