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बजट पर चर्चा

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नहीं टपकतीं। ऐसा कभी नहीं होता। सच तो यह है कि अगर आप जीवन की अच्छी चीजें चाहते हैं, तो आपको उनके लिए दाम चुकाना होगा। जब तक आप उनका दाम नहीं चुकाते हैं, वे आपको नहीं मिल सकतीं। इसलिए मैं उनमें से हूं, जिन्हें इस कर के लिए कोई अंतःकरणानुकुल आपत्ति नहीं है। मैं अवश्य ही उन लोगों में से हूं जो जीवन की अच्छी चीजें पाना चाहते हैं और उनके लिए दाम चुकाना चाहते हैं। इसलिए अब इस प्रश्न पर विचार करना है कि यह कर किसलिए लगाए जाते हैं? इसका उद्देश्य क्या है? सरकार कर लगाकर कौन सा अच्छा काम करना चाहती है? यह याद रखना आवश्यक है कि वित्त मंत्री अपनी कर की योजना से कुल 169 लाख रुपए के राजस्व की प्राप्ति करना चाहते हैं। महोदय! अब मैं बजट पर आता हूं। सबसे पहले तो यह पूछना चाहिए कि व्यय की नई मदें क्या हैं, जिन्हें इस बजट में शामिल किया गया है? अब मैंने व्यय की कुछ मदें छोड़ दी हैं, जिनका संबंध केवल प्रशासनिक विभागों से है और जिनका परिणाम जनता के प्रत्यक्ष लाभ के लिए नहीं है, जिसे हम समाज कल्याण कहते हैं। मैंने बजट में से नए व्यय की कुछ ऐसी मदें चुनी हैं, जो मेरे अनुसार जन-कल्याण को प्रभावित करती हैं। मैं यह पाता हूं कि इस बजट में सिंचाई के लिए साढ़े सात लाख रुपए की व्यवस्था की गई है। शिक्षा के लिए साढ़े सोलह लाख रुपए की व्यवस्था है, जिसमें से पांच लाख रुपए प्राथमिक शिक्षा के विस्तार के लिए, पांच लाख रुपए मकानों के लिए, 11.81 लाख रुपए मूल कलाओं का प्रचालन करने के लिए रखे गए हैं। जन-स्वास्थ्य के अंतर्गत कुछ उल्लेखनीय नहीं है, सिवाए इसके कि पांच लाख रुपए गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए रखे गए हैं। कृषि के लिए कुछ नहीं है, सहकारिता के लिए सात लाख रुपए हैं। ग्रामीण विकास के लिए तो कुछ है ही नहीं, सिवाए इसके कि उसमें 7,000 भटकते हुए लोगों को लाभ दिलवाना है, जो पूरी प्रेसिडेंसी में इधर से उधर, कुछ न कुछ प्रचार करते हुए घूमते-फिरते हैं। बस इसी से माननीय मंत्री समझते हैं कि जनता को लाभ मिलेगा।

दूसरे, दो लाख रुपए की व्यवस्था ऋण चुकाने के लिए की गई है। मैं एक बात का संकेत करना चाहता हूं, वह हैः इस प्रश्न के अलावा कि बजट में व्यय की जो व्यवस्था की गई है, वह प्रांत की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त है या नहीं, इस सदन को एक बात समझ लेनी चाहिए कि नए व्यय के लिए नए कर की कोई आवश्यकता नहीं है। माननीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में स्वयं कहा है कि 169 लाख रुपए के कुल करों में से केवल 44 लाख रुपए दो योजनाओं — एक, ग्रामीण शिक्षा का विस्तार, दो, ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, शेष 125 लाख रुपए मंत्रालय जो नए खर्च करना चाहता है, उसके लिए आवश्यक नहीं हैं। सरकार को यह 125 लाख रुपए की राशि किसी अन्य काम के लिए नहीं, पर मद्यनिषेध नीति के घाटे को पूरा करने के लिए चाहिए। अतः एक सीधा सा विचारणीय प्रश्न उठता है — क्या मद्यपान एक समस्या है? अगर मद्यपान समस्या है, तो क्या यह तात्कालिक