1. बजट पर चर्चा - Page 47

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

समस्या है? अगर यह सदन इन दोनों प्रश्नों के सकारात्मक उत्तर देने को तैयार है, तो फिर वित्त मंत्री के कर के प्रस्ताव पर मतदान करने का कोई औचित्य नहीं है। महोदय! हम इस स्थिति का विश्लेषण करने में कोई गलती न करें। यह कोई प्रश्न ही नहीं है कि मद्यपान एक बुराई है और इसके बहुत बुरे परिणाम निकलते हैं। लेकिन मद्यपान एक बुराई है, इसे स्वीकार करने का अर्थ यह नहीं है कि मद्यपान एक समस्या है या तात्कालिक समस्या है।

महोदय! अब हम इस स्थिति पर तुलनात्मक दृष्टि से देखें। बंबई प्रेसिडेंसी में क्या स्थिति है? हमें इस समय शेष भारत के संबंध में बिल्कुल भी परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम बंबई सरकार के बजट पर बहस कर रहे हैं। जहां तक मद्यपान का सवाल है, बंबई प्रेसिडेंसी की क्या स्थिति है और दूसरे देशों में क्या स्थिति है? सबसे पहले मैं विभिन्न देशों में उत्पाद शुल्क से प्राप्त हुए राजस्व के आंकड़े प्रस्तुत करना चाहता हूं। इसका कारण यह है कि किसी भी देश में उत्पाद शुल्क से प्राप्त राजस्व से पता चल जाता है कि उस देश के सम्मुख समस्या कितनी बड़ी है। ये आंकड़े 1931 के हैं, जिन्हें मैंने लीग ऑफ नेशंस द्वारा जारी ‘ब्लू बुक’ से लिया है। ग्रेट ब्रिटेन से शुरू करते हैं, जिसकी जनसंख्या 4,49,37,444 है और उत्पाद शुल्क 1,50,48,95,000 है। ऑस्ट्रिया अब नहीं है, परंतु 1937 में था, जिसकी जनसंख्या 67,60,233 और उत्पाद शुल्क से राजस्व की प्राप्ति 15.96 लाख से अधिक थी। कनाडा की जनसंख्या एक करोड़ है और उत्पाद शुल्क से प्राप्त राजस्व 57.19 लाख है। आयरिश फ्री स्टेट की जनसंख्या 29,65,854 है और उत्पाद शुल्क से राजस्व की प्राप्ति 665 लाख है। डेनमार्क की जनसंख्या 37 लाख है और उत्पाद शुल्क से राजस्व की प्राप्ति 5,34,80,000 है। फ्रांस की कुल जनसंख्या 419 लाख है, उत्पाद शुल्क से राजस्व की प्राप्ति 20,70,79,650 है। अब नार्वे के आंकड़ों को देखा जाए। इसकी कुल जनसंख्या 28,14,194 और उत्पाद शुल्क से राजस्व की प्राप्ति 1,66,72,000 है तथा जहां स्थानीय विकल्प भी है। महोदय! अब हम इस संदर्भ में अपनी प्रेसिडेंसी के आंकड़ों की तुलना करें। बंबई प्रेसिडेंसी की जनसंख्या 180 लाख है और उत्पाद शुल्क से कुल राजस्व की प्राप्ति 325 लाख है। क्या कोई कह सकता है कि बंबई प्रेसिडेंसी में शराब की जो खपत हो रही है, उससे कोई समस्या आने वाली है और जिससे इस प्रेसिडेंसी को तुरंत निबटना होगा? जो व्यक्ति इस प्रश्न का सकारात्मक उत्तर देगा, वह अवश्य ही ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जो अपनी सुध-बुध खो बैठा है (ठहाका)। एक और मामला लें। आप शराब के उपभोग को लें और मैंने बंबई सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में से ये आंकड़े लिए हैं। यहां के लोग कितनी शराब पीते हैं। बंबई सरकार द्वारा जारी की गई प्रशासन रिपोर्ट या ‘ब्लू बुक’ कहती है कि पूरी प्रेसिडेंसी में शराब की औसत खपत तीन ड्रम प्रति व्यक्ति है। मुझे बताया गया है कि यह एक औंस से कम है, वास्तव में चौथाई औंस है। इस पर भी सामने बैठे मेरे माननीय मित्र कहते हैं कि यह एक समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र में शराब की 1.8 ड्रम और कस्बों को