बजट पर चर्चा
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उतने संतुष्ट हैं कि हम थोड़ी देर के लिए उन्हें भूल जाएं और केवल इसी एक समस्या से निबटें। मैं कुछ उदाहरण प्रस्तुत करता हूं। सबसे पहले शिक्षा का प्रश्न उठाते हैं। इसमें प्रौढ़ शिक्षा की स्थिति इस प्रांत में इस प्रकार है। जहां तक पुरुषों का संबंध है, इनकी जनसंख्या के केवल 14.3 प्रतिशत लोग ही साक्षर हैं। जहां तक महिला जनसंख्या का संबंध है, केवल 2.4 प्रतिशत महिलाएं ही साक्षर हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि 86 प्रतिशत पुरुषों और 98 प्रतिशत स्त्रियों को प्रारंभिक अक्षर ज्ञान की आवश्यकता है, जिससे वे अपने जीवन की गतिविधियों को अन्य वर्गों के कपट का शिकार बने बिना चला सकें। इस मामले में रिपोर्ट बनाने के लिए सरकार ने एक कमेटी की नियुक्ति की थी। इसने अपनी रिपोर्ट दे दी है। लेकिन इस बजट में उस कमेटी के प्रस्तावों को कार्यरूप देने के संबंध में कोई प्रावधान दिखाई नहीं देता है। अब बच्चों की शिक्षा को ही लीजिए। क्या आप जानते हैं कि इस प्रेसिडेंसी में इसकी क्या स्थिति है? इस प्रांत में एक चीज ऐसी है, जिससे बिल्कुल इंकार नहीं किया जा सकता और वह यह है कि सरकार ने कॉलेज शिक्षा के संबंध में अपना दायित्व नहीं निभाया है। मैं समझता हूं कि इस मुद्दे पर कोई संदेह हो ही नहीं सकता। यह सरकार इस प्रेसिडेंसी के लड़कों को उच्च शिक्षा देना अपना काम नहीं मानती। यह काम उसने निजी एजेंसियों पर छोड़ रखा है। चलिए, सेकेंडरी शिक्षा को लीजिए। यहां भी स्थिति कमोबेश वैसी ही है। सरकार अपने कंधे पर कोई जिम्मेदारी नहीं लेती। हां, वह यह काम जरूर करती है कि निजी एजेंसियां जो धन इकट्ठा करती हैं, उसमें सरकारी खजाने से थोड़ा सा अनुदान देकर कुछ इजाफा कर देती है। इसलिए जहां तक शिक्षा का संबंध है, हमारे पास वास्तव में गतिविधि का क्षेत्र ही बहुत सीमित है। अब प्राथमिक शिक्षा को लीजिए। सरकार ने इस संबंध में क्या किया है? इस सिलसिले में जो आंकड़े मैं कल इकट्ठा कर पाया हूं, उससे ज्ञात होता है कि स्थिति यह हैः प्राथमिक शिक्षा अधिनियम 6 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों पर लागू होता है। इस आयु वर्ग में कुल 24,79,000 बच्चे हैं। इनमें से 7,54,000 बच्चे स्कूल जाते हैं और बाकी बच्चे स्कूल नहीं जाते। इस अनुपात को इस रूप में समझा जाए कि हर तीन बच्चों में से एक बच्चा स्कूल जाता है और दो बच्चे स्कूल नहीं जाते। इस प्रश्न की जांच सुविधाओं की दृष्टि से करें, जिन्हें सरकार प्राथमिक शिक्षा के लिए देती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्रेसिडेंसी के कस्बों में 184 प्राथमिक स्कूल हैं।
यह तो हुआ शहरों के संबंध में। गांवों में स्थिति क्या है? इस प्रेसिडेंसी में कुल 21,484 गांव हैं। इनमें से केवल 8,599 गांवों में स्कूल हैं। 12,885 गांवों में कोई स्कूल नहीं है। तो स्थिति यह है। सरकार उन्हें सुविधाएं प्रदान करने के लिए कुछ नहीं करती, प्राथमिक शिक्षा अधिनियम की व्यवस्थाओं को लागू करना तो अलग बात है। महोदय! यहां मुझे एक असाधारण बात ध्यान में आ रही है। मैं नहीं जानता कि माननीय वित्त मंत्री का ध्यान उस पर गया है या नहीं। अगर प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बना दिया जाए, तो उस पर कुल कितना व्यय होगा? प्राथमिक शिक्षा