1. बजट पर चर्चा - Page 51

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

समिति द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, बंबई सरकार को प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने पर 1.30 लाख रुपए व्यय करने होंगे। महोदय! इतनी ही राशि माननीय वित्त मंत्री कर प्रस्तावों से ले रहे हैं। कर प्रस्ताव अच्छे हैं या नहीं, वह अलग बात है। मैं अपना ध्यान इस प्रश्न पर केन्द्रित करना चाहता हूं कि कौन सी श्रेष्ठ पद्धति से और किस उद्देश्य के लिए बजट से प्राप्त धन का उपयोग किया जाए। यही प्रश्न मैं माननीय वित्त मंत्री से पूछना चाहता हूं। आप 1.30 लाख रुपए इकट्ठा कर रहे हैं। क्या यह आवश्यक है कि आप शराबखोरों की स्थिति सुधारने के लिए इस धन का व्यय करें या आपको उस धन को उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च करना चाहिए, जो शिक्षा नहीं ले पाते? यह महत्त्व का प्रश्न है। वास्तव में, क्या बच्चों की शिक्षा उन दस लाख शहरी लोगों से कम महत्त्वपूर्ण है, जो शराब पीना पसंद करते हैं? महोदय! मैं इस पर विश्वास नहीं करता। मैं स्वयं शराब नहीं पीता और मैं चाहता हूं कि कोई भी न पिए। परंतु समस्या यही है। अगर आप मुझे एक शिक्षित व्यक्ति दिखा दें, जो संयमी भी हो, तो मैं उसका स्वागत करूंगा। लेकिन अगर आप ऐसे संयमी को अपनाने को कहते हैं जो मूर्ख हो, जो निकम्मा हो, जो कुछ नहीं समझता हो, तो मैं उसकी तुलना में उस व्यक्ति को पसंद करूंगा, जो पीता हो, परंतु कुछ जानता तो हो। मेरी वही स्थिति है। मैं समझता हूं, माननीय वित्त मंत्री को ऐसी ही स्थिति को भारी कराधान के प्रस्ताव जिसे वह प्रांत पर लगाना चाहते हैं, वितरण करते समय ध्यान में रखनी चाहिए।

एक और विकल्प लें। मैं जन-स्वास्थ्य की बात कर रहा हूं। यह प्रांत जन-स्वास्थ्य पर जो कुल 31,48,000 रुपए की मामूली राशि खर्च करता है, इसका हिसाब लगाएं, तो यह हमारे संपूर्ण बजट के कुल ढाई प्रतिशत की दर बैठती है। महोदय! गांवों में पानी की तत्काल आवश्यकता है। सैकड़ों गांवों को पानी नसीब नहीं होता। जो कोई भी गांव में जाएगा, उसे महसूस होगा कि गांव गोबर के ढेर के सिवाए और कुछ नहीं है। उन्हें गांव कहना गलत है। उन्हें रहने की जगह कहना भी गलत है। हमारे प्रांतों के गांवों में जो गंदगी है, उनमें सुधार लाना आज की तात्कालिक आवश्यकता है। सैकड़ों लोग मलेरिया व अन्य बीमारियों से मर रहे हैं। मुश्किल से ही कहीं औषधालय है। दवा के वितरण या चिकित्सा के लिए शायद ही कहीं कोई व्यवस्था है। जैसा मैंने कहा है, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पिछले वर्ष 10 लाख रुपए का प्रावधान किया गया था। हम नहीं जानते, वह रुपया कैसे खर्च हुआ। इस वर्ष 8,55,000 रुपए का प्रावधान किया गया है। क्या यह विकट समस्या से जूझने के लिए पर्याप्त है? सैकड़ों लोग सिर्फ इसलिए मर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डॉक्टरी चिकित्सा नहीं मिलती, पीने का पानी नहीं मिलता। वित्त मंत्री ने यह धन बंबई और अहमदाबाद के 10 लाख शराबियों की आत्मा की रक्षा करने के लिए, बाईबल की भाषा प्रयोग करें, तो उनकी आत्मा की शुद्धि के लिए या उनको पुरोहित बनाने के लिए खर्च करने के लिए सोचा है।

महोदय! एक और मुद्दा भी है। वही मुद्दा उठाया गया है कि हम शहर में रहने