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बजट पर चर्चा

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वालों, शहरी जनसंख्या पर कर लगा रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? हम शहरी जनसंख्या पर कर इसलिए लगाते हैं, क्योंकि हम गांव के लोगों को सुविधाएं देना चाहते हैं। क्या इस बजट में ऐसा कुछ किया गया है? अगर मंत्री महोदय वास्तव में ऐसा ही कर रहे हैं, जिसके लिए मेरे कुछ मित्रों ने काफी ध्यान दिया है, तो इससे मुझे अत्यंत प्रसन्नता होगी। करों से प्राप्त 1.69 लाख रुपए की राशि किस पर खर्च होती है? वह शराबियों के कल्याण पर खर्च करेंगे, जो शहरों में रहते हैं। गांव के निर्धन व्यक्ति को इसमें से कोई लाभ नहीं मिलेगा। उदाहरण के लिए केवल एक मद, भूमि-कर को लेते हैं। इस प्रेसिडेंसी में कुल भू-राजस्व 3,38,63,000 रुपए का है। पिछले वर्ष 10 लाख रुपए की छूट दी गई थी। वह स्थायी कटौती नहीं है। बजट में यह संकेत दिया गया है कि 40 लाख रुपए की स्थायी कटौती की जाएगी। इसका अर्थ है कि ग्रामीण जनसंख्या को अब भी तीन करोड़ रुपए भू-राजस्व के रूप में बर्दाश्त करेन होंगे। मैं वित्त मंत्री से यह प्रश्न पूछना चाहता हूं। अगर वह शहर की जनता के कर के रूप में 1.69 लाख रुपए प्राप्त करते हैं, तो वह भू-राजस्व को पूरी तरह क्यों नहीं

खत्म कर देते? मैं स्वयं इससे बहुत खुश होऊंगा। अगर वह इन करों से प्राप्त होने वाली संपूर्ण धन राशि को भू-राजस्व खत्म करने में लगा देते हैं, तो मैंने बजट का जो विरोध किया है, उस सबको वापस ले लूंगा। क्या वह ऐसा करेंगे? वह ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?

महोदय! अब तो बस एक-दो मुद्दे ही रह गए हैं, जिन पर मुझे बोलना है। इस बजट में माननीय वित्त मंत्री दो कामों के लिए श्रेय लेना चाहते हैं। एक यह है कि वह सभी करों को शहरी क्षेत्रों में लगा रहे हैं। दूसरे, सब मिलाकर उन्होंने कोई नया भार नहीं डाला है। इसका कारण यह है कि नए कर के रूप में जो कर लगाया गया है, वह मद्यनिषेध का घाटा पूरा करने के लिए है। इसलिए, जोड़-घटाव के बाद योग वही आता है। अब पहले प्रश्न के संदर्भ में मैं कुछ महत्त्वपूर्ण आंकड़ों की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं। मेरा यह विचार रहा है और यह विचार मेरे इस प्रांत की स्थितियों के अध्ययन से पुष्ट होता है कि जहां तक हमारे प्रांत का संबंध है, कृषि सबसे घना व्यवसाय है। मैं अपनी बात के समर्थन में कुछ आंकड़े देना चाहता हूं। पहली ध्यान देने योग्य बात यह है कि बंबई क्षेत्र की दृष्टि से एक छोटी प्रेसिडेंसी है। इस प्रेसिडेंसी का कुल क्षेत्रफल 76,735 वर्ग मील है, जो मद्रास प्रेसिडेंसी के आधे, पंजाब, संयुक्त प्रांत और मध्य प्रांत के दो - तिहाई के बराबर और बिहार, उड़ीसा से कुछ कम है। इस बात को ध्यान में रखते हुए उस क्षेत्र की तुलना कीजिए, जिस पर

खेती के लिए बुआई होती है, जिस पर खाद्यान्न की फसलें उगाई जा सकें। बंबई में बुआई वाला क्षेत्र 32,801,971 एकड़ है। जैसा कि मैंने कहा है, हमारी प्रेसिडेंसी छोटी है, परंतु वास्तव में बुआई वाला क्षेत्र उतना ही है, जितना कि मद्रास में है, यानी ऐसी प्रेसिडेंसी जो बंबई से दोगुनी है। संयुक्त प्रांत में भी बुआई का क्षेत्र उतना ही है। यह