36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रांत के बुआई क्षेत्र से 80 लाख एकड़ अधिक है। पंजाब के बुआई क्षेत्र से 60 लाख एकड़ अधिक है। मेरा दावा है कि इस प्रेसिडेंसी में कृषि सबसे अधिक घना उद्योग है, यानी हरेक इंच क्षेत्र जिसका उपयोग किया जा सकता था, उसका उपयोग किया जा चुका है। इसलिए अब कृषि की ओर लोगों को ढकेलने की कोई आवश्यकता नहीं है। कृषि योग्य बंजर भूमि की थोड़ी और तुलना करके देखें, जो संयुक्त प्रांत में 100 लाख एकड़, मद्रास में 130 लाख एकड़, मध्य प्रांत में 140 लाख एकड़, पंजाब में 140 लाख एकड़ है और जबकि बंबई में यह केवल 60 लाख एकड़ है। महोदय! इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेरा यह विचार बन रहा है और मैं यह बात पूरे सोच-विचार के साथ कह रहा हूं कि इस प्रेसिडेंसी की मुक्ति, और मैं कह सकता हूं कि संपूर्ण भारत की मुक्ति, इस बात में है कि यहां और अधिक शहरीकरण किया जाए, हमारे कस्बों में नए जीवन का संचार किया जाए, उद्योगों की स्थापना की जाए और जितना संभव हो सके, ग्रामीण जनसंख्या को शहरों में पहुंचा दिया जाए। गांवों में क्या रखा है? वैसे भी, हमारे ग्रामीणों के पास इतना धन नहीं होता कि अपनी कृषि को सर्वोच्च ढंग से चला सकें, जैसे कि चलाना चाहिए। जनसंख्या हर दशक में बढ़ रही है और नए उत्तराधिकारियों के उत्पन्न हो जाने से भूमि का विभाजन होता जा रहा है। हर जगह हालत इतनी खराब है, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। गांवों के लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए एक ही रास्ता है कि उन्हें चरखे जैसी पुरानी मशीन न दें या उन्हें कपड़ा बुनने के लिए मजबूर न करें, जिसे वे प्रतिस्पर्धी बाजार में बेच न सकें। उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए उद्योगों को नष्ट न करें, शहरों में अन्य सेवाओं को नष्ट न करें और लोगों को गांवों में जाने के लिए मजबूर न करें। इसका उपाय दूसरी दिशा में है, यानी अधिक से अधिक लोगों को गांवों से शहरों में ले जाया जाए, वहां उन्हें उद्योगों में रोजगार दिया जाए और उनका आर्थिक जीवन बेहतर बनाया जाए। यही रास्ता है। महोदय! मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि जो व्यक्ति, हमारे पास जो कुछ छोटे उद्योग हैं, उन्हें तोड़ने पर तुला है, वह जनता का दोस्त नहीं, दुश्मन है।
अब दूसरा मुद्दा लेते हैं। मेरे माननीय मित्र कहते हैं : आखिर मैं क्या कर रहा हूं? क्या मैं योगफल में कुछ जोड रहा हूं? नहीं, मैं 1.69 लाख रुपए जुटा रहा हूं, लेकिन मैं इसके साथ 1.25 लाख रुपए का शराब राजस्व और 40 लाख रुपए का भू-राजस्व छोड़ रहा हूं। मैं नहीं जानता हूं कि क्या वह यह श्रेय गंभीरता से ले रहे हैं। अगर वह इसे गंभीरता से ले रहे हैं, तो मैं उन्हें उस कुम्हार की याद दिलाऊंगा, जिसे कुछ मिट्टी दी गई थी। अगर वह कुम्हार गणपति की मूर्ति के बदले बंदर की मूर्ति बना दे, या हाथी की मूर्ति बनाने के बदले गधे की मूर्ति बना दे, तो क्या आप उसे अच्छा कुम्हार कहेंगे, क्योंकि उसने अधिक मिट्टी खर्च नहीं की? मैं जानने के लिए उत्सुक हूं कि इसका उत्तर क्या हो। यह केवल गणपति के बदले बंदर बनाने के सिवाए और कुछ नहीं है। महोदय! इसलिए जैसा कि मैंने शुरू में कहा था, यह बजट जहां तक