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वित्त अधिनियम - संशोधन विधेयक *
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : (बंबई नगर) : अध्यक्ष महोदय! माननीय वित्त मंत्री द्वारा
प्रस्तुत किया गया विधेयक मेरे ख्याल से मुख्यतः तीन प्रावधान करना चाहता है। पहला
प्रावधान संपत्ति कर को प्रथम शुल्क बनाने, दूसरा प्रावधान संपत्ति कर न अदा करने
पर जुर्माने के संबंध में है और तीसरा प्रावधान जुर्माने को पूर्व-प्रभावी रूप से लागू
करने से संबंधित है। सबसे पहले तो मैं यह बता दूं कि मैं माननीय वित्त मंत्री को
बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने स्वयं ही अपने भाषण में कहा है कि वह पूर्व-प्रभावी
जुर्माने वाली धारा को वापस लेने के उद्देश्य से इस विधेयक में संशोधन करने के
लिए तैयार हैं। इतना तक तो ठीक है। यह सब होते हुए भी मेरे लिए इस मुद्दे से
दूसरे मुद्दों पर बिना आश्चर्य प्रकट किए जाना मुमकिन नहीं है कि जिस सरकार में
पांच-पांच नामी-गिरामी वकील मौजूद हों, उसने शुरू में ही ऐसा विधेयक लाना ठीक
समझा, जिसमें पूर्व-प्रभावी जुर्माने का प्रावधान है। यह वाकई बहुत खराब बात है।
यह विधेयक इस रूप में नहीं लाया जाना चाहिए था। बहरहाल, अब मैं इस विधेयक
के बाकी दो प्रावधानों की ओर आता हूं, यथा क्या संपत्ति कर को प्रथम शुल्क बनाना
चाहिए और उसे अदा न करने पर जुर्माना लगाना चाहिए?
मैं पहले जुर्माने से संबंधित दूसरे प्रावधान पर आता हूं। मेरे विचार से इस विधेयक
से संबंधित एक-दो बातों की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट करना मेरे लिए उपयुक्त
होगा। मेरे काबिल दोस्त ने शायद इस पर ठीक से ध्यान नहीं दिया है, लेकिन उन्हें
मालूम होगा कि नगरपालिका अधिनियम में भी संपत्ति कर न देने पर जुर्माना लगाने
का कोई प्रावधान नहीं है। बंबई नगरपालिका अधिनियम की धारा 200 में प्रावधान
है कि जैसे ही कर का निर्धारण हो जाता है, वैसे ही बिल उस अभिधारक को दे
दिया जाएगा, जिसे उसका भुगतान करना है। इसके बाद धारा 202 के अनुसार, ऐसे
बिल की अदायगी उसकी प्राप्ति के दिन से अगले 15 दिन के अंदर करनी होगी।
तत्पश्चात् धारा 203 में प्रावधान है कि अगर बिल की अदायगी 15 दिन के भीतर नहीं
होती है, तो फौरन ही दावे की अधिसूचना भेजी जाएगी और अगर यह अधिसूचना
* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 6, पृ. 1033-37, 26 अगस्त 1939