वित्त अधिनियम - संशोधन विधेयक 39
भेजे जाने पर भी बिल की अदायगी नहीं होती है, तो नगरपालिका को अधिकार प्राप्त होगा कि वह इस रकम की वसूली कर सके। दोषी व्यक्ति से संपत्ति कर की वसूली करने के लिए नगरपालिका को समर्थ बनाने के उद्देश्य से नगरपालिका अधिनियम में दो प्रावधान हैं। पहला है, उस व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की करवाना। और दूसरा तरीका है, नगरपालिका ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कचहरी में बाकायदा दावा दायर करे। लेकिन जहां तक जुर्माने का सवाल है, नगरपालिका अधिनियम के अंतर्गत इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। रही बात दूसरी वित्तीय कार्यवाहियों की, तो इसके लिए मैं आयकर अधिनियम के एक प्रावधान की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। मेरे माननीय मित्र ने जरूर गौर फरमाया होगा कि आयकर अधिनियम के अंतर्गत दोषी व्यक्तियों के लिए एक तरह के जुर्माने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था अधिनियम की धारा 45 के तहत है। यह बहुत बड़ी धारा है और मैं इस समूची धारा के विस्तार में नहीं जाना चाहता। इस धारा का सार यह है कि इसमें लगातार बकाया रकम से निबटने के लिए एक योजना दी गई है। इस योजना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बकाया रकम की अदायगी एक दिन के बाद करता है, तो उसे कुछ जुर्माना देना होगा और दो दिन की बकाया रकम की अदायगी करने पर उसे ज्यादा जुर्माना देना होगा, यानी कि क्रमिक जुर्माना। अधिकतम जुर्माने की रकम जो तय की है, वह कर की रकम जितनी है। इस धारा के हिसाब से लगातार बकाया रकम की अदायगी के लिए सतत जुर्माना नहीं है। अब मैं बंबई भू-राजस्व संहिता पर आता हूं। जुर्माने का जि़क्र धारा 148 में किया गया है। इस जुर्माने की व्यवस्था महज इतनी भर है कि अगर कोई व्यक्ति कर देने के मामले में विफल रहता है, कहने का आशय यह है कि अगर वह अपनी किश्त समय पर नहीं दे पाता है, तो कलेक्टर या तो जुर्माना लगाएगा या बकाया रकम पर ब्याज। नियमों के अनुसार, केवल एक अधिकृत सरकार है, जो इस संबंध में नियम बना सकती है। बंबई सरकार द्वारा भू-राजस्व संहिता के तहत बताए गए कानूनों का अध्ययन करने के बाद मैं यह पाता हूं कि सरकार ने जुर्माना लगाने या ब्याज वसूलने के बारे में कोई नियम नहीं बनाया है। दावे की अधिसूचना में सरसरी तौर पर उल्लेख किया गया है कि जुर्माने की अधिकतम सीमा बकाया रकम के एक - चौथाई हिस्से से अधिक नहीं होगी। महोदय, मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि जुर्माने का सिद्धांत नया है, परंतु निस्संदेह यह कई वित्तीय प्रावधानों में देखने को मिलता है। अब हमारे सामने विचाराधीन प्रश्न यह है कि जुर्माना किस ढंग से लगाया जाए और इसकी अधिकतम सीमा क्या हो।
इस विधेयक के बाकी प्रावधानों के बारे में माननीय मंत्री महोदय ने हमें बताया है कि यह केवल परिणति है। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि ये प्रावधान सबसे ज्यादा विवादास्पद हैं। इस विधेयक में अगर कोई प्रावधान है जिसके कारण मैं इसका विरोध करता हूं, तो वह वास्तव में धारा 24 ख है, जिसे मेरे माननीय मित्र प्रस्तुत करना