40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
चाहते हैं। सबसे पहले मैं इस मुद्दे पर आता हूं कि यह विधेयक केवल परिणति है। क्या यह केवल परिणति है या यह सर्वाधिक क्रांतिकारी है?
माननीय श्री ए.बी. लाट्ठे : मैंने कभी नहीं कहा कि यह परिणति है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं अपने शब्द वापस लेता हूं।
माननीय श्री ए.बी. लाट्ठे : मैंने कहा था कि यह प्रावधान को स्पष्ट करने के लिए है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : इसमें संदेह नहीं है कि स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मंत्री महोदय ने बंबई नगरपालिका को मुद्दा बनाया है। हमारी स्थिति अब क्या है? स्थिति यह है कि क्या बंबई नगरपालिका को देय शहरी संपत्ति कर प्रथम शुल्क होना चाहिए या नहीं। आपको शायद याद होगा कि फरवरी में जब इस विधेयक पर पहली बार चर्चा हुई थी, तब इसकी इस आधार पर आलोचना की गई थी कि सरकार शहरी संपत्ति पर कर डालकर नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है, जबकि यह अधिकार नगरपालिका को आम सहमति और परंपरागत रूप से प्राप्त है। सरकारी पक्ष में कई माननीय सदस्यों, विशेष रूप से मेरे माननीय मित्र श्री जमनादास मेहता ने इस विधेयक की इस बात पर आलोचना की थी कि नगरपालिका के कर वसूली के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करके सरकार ने नगरपालिका को पंगु बना दिया है। यह आलोचना का एक मुद्दा है। आलोचना का दूसरा मुद्दा यह है कि सरकार ने बंबई नगरपालिका को इन करों की वसूली करने वाला एजेंट बनाकर बहुत ही गलत काम किया है। एक सुझाव यह दिया गया था कि जिस प्रकार केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा लगाए गए करों को वसूल करने के लिए अपनी ही मशीनरी का उपयोग करती है, जैसे उत्पाद शुल्क, आयकर, नमक पर कर, उसी प्रकार बंबई सरकार को भी यह कर अपनी ही एजेंसियों द्वारा वसूलना चाहिए। मेरे माननीय मित्र ने इस स्थापित सिद्धांत और कुशल पद्धति से हटकर इस कर की वसूली के लिए नगरपालिका की मुश्किल इतनी नहीं बढ़ाई, जितनी कि वह अब बढ़ा रहे हैं। उस वक्त उन्हें यह कहने का साहस नहीं था कि बंबई सरकार की ओर से नगरपालिका द्वारा वसूल किया गया शहरी संपत्ति कर प्रथम शुल्क होगा। उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। मैं इस समूचे विधेयक को पढ़ गया हूं, लेकिन मुझे उपर्युक्त प्रावधान कहीं नहीं दिखाई दिया। इसलिए मेरा दावा है कि यह एक नया मुद्दा है।
अब इस विधेयक के पेश होने से पहले क्या स्थिति थी? अगर हम बंबई नगरपालिका अधिनियम की धारा 212 को देखें, तो पता चलेगा कि स्थिति यह थीः इस धारा के अनुसार, बंबई नगर में स्थित संपत्ति पर प्रथम शुल्क भू-राजस्व था, जो कि नगरपालिका के अधीन है। भू-राजस्व के बाद प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहला दावा नगरपालिका का था। उस वक्त यह स्थिति थी। अब क्या स्थिति होने वाली है? अब स्थिति ऐसी होने वाली है : भू-राजस्व प्रथम प्रभार होगा और सरकार को देय शहरी संपत्ति कर अब द्वितीय प्रभार होगा तथा नगरपालिका जिसका संपत्ति