2. वित्त अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 59

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

करेगा कि उनके पास कौन से सामान्य गहने हैं और कौन से हीरे-जवाहरात हैं? ऐसे मामले में नगरपालिका क्या करे? उसके पास तो पुलिस की फौज भी नहीं है। उसके पास कोई पूंजी और साधन नहीं है, जिससे कि लोगों पर दबाव डाल सके। आखिर, उन्हें तो कर लगाना है, फिर वह ही पहल करें और साहसी व्यक्ति की तरह अपनी एजेंसी को उस काम में लगाएं तथा उनसे कर उगाही करें, जो देना नहीं चाहते। नगरपालिका को कठिनाई में क्यों डाला जाए? यही मेरा कहना है। शेष बातों पर मैं बहस नहीं करना चाहता। मैं उनकी चिंता नहीं करता, परंतु वास्तव में मुद्दा यह है कि क्या बंबई सरकार को यह छूट दी जाए कि वह बंबई नगरपालिका को उन बातों के लिए कठिन स्थिति में डाले, जिसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है? आप अपने दायित्व से क्यों मुंह मोड़ें? यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि यह विधेयक सबसे अधिक कायरतापूर्ण है और मुझे यह कहने में कोई संकोच भी नहीं है। अगर आप कह सकते हैं कि यह कर लोकप्रिय है, तो फिर आप इसकी उगाही की जिम्मेदारी से क्यों बच रहे हैं? आप नगरपालिका पर बोझ क्यों लाद रहे हैं? आप उनके साधनों को क्यों काम में ला रहे हैं? इस दृष्टि से मैं निश्चित रूप से यह समझता हूं कि यह कायरतापूर्ण विधेयक है, जिसका समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।