3. शिक्षा के लिए अनुदान - Page 61

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

खर्च करें ही, जितनी हम लोगों से उत्पाद शुल्क के रूप में लेते हैं। हम इस प्रेसिडेंसी में शिक्षा पर प्रति व्यक्ति 14 आना खर्च करते हैं, परंतु उत्पाद शुल्क से हमारी प्राप्ति 2-2-9 रुपए (2.17 रुपए) होती है। मेरे विचार से यह न्यायोचित होगा कि शिक्षा पर हमारा खर्च इस प्रकार तय किया जाए कि हम लोगों की शिक्षा पर उतना खर्च करें, जितना हम उनसे लेते हैं।

एक दूसरा मुद्दा, जो इसी प्रकार का है और जिसके प्रति मैं अपने माननीय मित्र शिक्षा मंत्री का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं, वह यह है कि हम इस समय प्राथमिक शिक्षा पर जो खर्च कर रहे हैं, उसके अधिकांश भाग का वास्तव में अपव्यय हो रहा है। प्राथमिक शिक्षा का उद्देश्य यह है कि प्राथमिक विद्यालय में दाखिल होने वाला हर बच्चा स्कूल तभी छोड़े, जब वह साक्षर हो जाए और अपने शेष जीवन में वह साक्षर बना रहे। लेकिन हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो हमें पता चलेगा कि प्राथमिक स्कूलों में दाखिल होने वाले हर एक सौ बच्चों में से केवल 18 बच्चे ही कक्षा चार तक पहुंचते हैं और शेष बच्चे, यानी 100 में से 82 बच्चे पुनः निरक्षरता की दुनिया में चले जाते हैं। इस परिस्थिति का इलाज क्या है? महोदय! शिक्षा की समीक्षा पर अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार ने जो टिप्पणी दी है, उसे मेरे विचार से सफाई दिए बिना सदन को पढ़कर सुना देना चाहिए। यह रिपोर्ट इस प्रकार है :

शिक्षा के प्रयत्न व्यर्थ हो रहे हैं और अधिकांश शिक्षा शास्त्रियों की यह राय है कि भारत में इस समस्या का कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह विवशता है। प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा के प्रयत्नों की कुल बरबादी और उसके साथ-साथ शिक्षा पर खर्च होने वाले धन का अपव्यय कुल प्रयासों का लगभग पचास प्रतिशत है।

इसलिए मैं माननीय शिक्षा मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वह प्राथमिक शिक्षा पर अधिक खर्च करें, कम से कम यह देखने के लिए ही करें कि वह जो खर्च करें अंततः उसका कुछ परिणाम तो निकले। महोदय! यह तर्क उस तर्क से बहुत अलग नहीं है, जो सरकारी पक्ष के सदस्यों ने ‘बेक बे’ उधार के मामले में दिया था। हमें बताया गया था कि ‘बेक बे’ पर अधिक धन खर्च करने का आग्रह इसलिए किया गया था कि अगर हम ऐसा नहीं करते, तो उस पर जो खर्च हुआ है, वह बेकार जाएगा। मैं समझता हूं कि अब वही तर्क इस मामले में भी दिया जा सकता है और हम कह सकते हैं कि अगर पर्याप्त धन खर्च करके हर बच्चा जो स्कूल में प्रवेश करता है, उसे कक्षा चार तक नहीं पहुंचाया जाएगा, तो हमने उस पर जो खर्च पहले ही किया है, वह बेकार चला जाएगा।

महोदय! तीसरा मुद्दा जिसकी ओर मैं माननीय शिक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, वह यह है। उन आंकड़ों की जो हमें जानकारी देते हैं कि इस प्रेसिडेंसी में शिक्षा का वित्तीय प्रबंध कैसे होता है? छानबीन करने से मुझे यह पता लगा है कि आर्ट्स कॉलेजों पर जो खर्च किया जाता है, उसका 36 प्रतिशत भाग फीस से