शिक्षा के लिए अनुदान
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मिलता है, हाई स्कूलों पर जो खर्च होता है, उसका 31 प्रतिशत भाग फीस से आता है। मिडिल स्कूलों पर जो खर्च होता है, उसका 21 प्रतिशत भाग फीस से आता है। महोदय! मेरा निवेदन है कि यह शिक्षा का व्यावसायीकरण है। शिक्षा तो एक ऐसी चीज है, जो कि सबको मिलनी चाहिए। शिक्षा विभाग ऐसा नहीं है, जो इस आधार पर चलाया जाए कि जितना वह खर्च करता है, उतना विद्यार्थियों से वसूल किया जाए। शिक्षा को सभी संभव उपायों से व्यापक रूप में सस्ता बनाया जाना चाहिए। मैं यह निवेदन इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि मैं महसूस करता हूं कि अब हम उस स्थिति पर आ गए हैं, जब समाज के निचले तबके के लोगों के बच्चे हाई स्कूल, मिडिल स्कूल और कॉलेजों में जा रहे हैं। इसलिए इस विभाग की नीति यह होनी चाहिए कि निचले वर्गों के लिए उच्च शिक्षा को जितना संभव हो सस्ता बनाया जाए। इसलिए मैं माननीय शिक्षा मंत्री का ध्यान इस प्रेसिडेंसी में शिक्षा प्रशासन के इसी चुभते हुए तथ्य की ओर आकर्षित करना चाहूंगा।
महोदय! चौथा मुद्दा जिसकी ओर मैं अपने मान्य मित्र शिक्षा मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं, वह यह है कि इस प्रेसिडेंसी में विभिन्न वर्गों में शिक्षा के तुलनात्मक विकास में बहुत असमानता पाई जाती है। इससे पहले कि मैं इस मुद्दे पर अपनी बात कहूं, मैं आपके सामने एक तथ्य प्रस्तुत करना चाहता हूं और वह यह है कि इस प्रेसिडेंसी की जनगणना रिपोर्ट ने विभिन्न जातियों में शिक्षा के विकास की तुलना के लिए कुल जनसंख्या को चार वर्गों में बांटा है। पहला वर्ग ‘विकसित हिन्दुओं’ का है। दूसरे वर्ग में ‘मध्यवर्ती हिन्दू’ आते हैं और इस वर्ग में वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अब राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गैर-ब्राह्मण, जैसे मराठा तथा अन्य संबंधित जातियां कहा जाता है।
तीसरा वर्ग पिछड़ी जातियों का है, जिनमें दलित वर्ग, पहाड़ी आदिम जातियां और अपराधी आदिम जातियां शामिल हैं। चौथे वर्ग में मुसलमान आते हैं। इस वर्गीकरण को ध्यान में रखते हुए यह पता चलता है कि शिक्षा के मामले में इन विभिन्न जातियों की तुलनात्मक प्रगति में बहुत भारी असमानता है। अब हम इन वर्गों के लोगों की तुलना उनके जनसंख्या के क्रम के अनुसार और उनके शिक्षा के विकास के क्रम के अनुसार करें, तो हम किस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं? मैं पाता हूं कि मध्यवर्ती वर्ग, यानी गैर-ब्राह्मण जो जनसंख्या की दृष्टि से पहले स्थान पर हैं, वह कॉलेज शिक्षा में तीसरे, सैकेंडरी शिक्षा में तीसरे और प्राथमिक शिक्षा में तीसरे स्थान पर हैं। पिछड़ी जातियां, जो जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर हैं, वे कॉलेज शिक्षा में चौथे, सैकेंडरी शिक्षा में चौथे और प्रशासनिक शिक्षा में चौथे स्थान पर हैं। मुसलमान जो जनसंख्या की दृष्टि से तीसरे स्थान पर हैं, वे कॉलेज शिक्षा में दूसरे, सैकेंडरी शिक्षा में दूसरे और माध्यमिक शिक्षा में दूसरे स्थान पर हैं। विकसित हिन्दू, जो जनसंख्या की दृष्टि से चौथे स्थान पर हैं, वे कॉलेज शिक्षा में पहले, सैकेंडरी शिक्षा में पहले