3. शिक्षा के लिए अनुदान - Page 63

46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

और प्राथमिक शिक्षा में पहले स्थान पर हैं। महोदय! मैंने विभिन्न जातियों की शिक्षा के क्षेत्र में तुलनात्मक प्रगति के बारे में असमानता का खाका पेश कर दिया है। इन आंकड़ों से यह पता नहीं चलता कि हमारी प्रेसिडेंसी में विभिन्न जातियों के बीच असमानता कितनी है। इसलिए मैं यहां माननीय शिक्षा मंत्री के गंभीर विचार के लिए ये आंकड़े प्रस्तुत करता हूं। पहले प्राथमिक शिक्षा को लेते हैंः

(विद्यार्थी, अपनी जनसंख्या के प्रति एक हजार में)

विकसित हिन्दू 119

मुसलमान 92

मध्यवर्ती वर्ग 38

पिछड़ी जातियां 18

यह थी, प्राथमिक शिक्षा की स्थिति। अब सैकेंडरी शिक्षा को लेते हैंः

(विद्यार्थी, अपनी जनसंख्या के प्रति एक लाख में)

विकसित हिन्दू 3,000

मुसलमान 500

मध्यवर्ती वर्ग 140

पिछड़ी जातियां 14

यह थी, सैकेंडरी शिक्षा की स्थिति। अब हम कॉलेज शिक्षा को लेते हैंः

(विद्यार्थी, अपनी जनसंख्या के प्रति दो लाख में)

विकसित हिन्दू 1,000

मुसलमान 52

मध्यवर्ती वर्ग 14

पिछड़ी जातियां शून्य (या लगभग एक अगर है भी तो)

यह है, पिछड़ी जातियों की कॉलेज शिक्षा की स्थिति, जबकि उनकी कुल जनसंख्या लगभग साढ़े सैंतीस लाख है। महोदय! इन आंकड़ों से दो निष्कर्ष निकलते हैं। एक, शिक्षा के मामले में विभिन्न जातियां एक समान नहीं हैं। इनसे एक और बात भी मालूम होती है, जिसकी ओर मैं सदन का ध्यान दिलाना चाहता हूं। वह यह है कि शिक्षा के मामले में मुसलमान आगे निकल गए हैं। महोदय! यह काल्पनिक विवरण नहीं है। मैंने जो आंकड़े इस सदन के सामने प्रस्तुत किए हैं, वे ‘पब्लिक इंस्ट्रक्शन फॉर बोंबे’ के निदेशक की 1923-24 की रिपोर्ट से लिए गए हैं और इस तर्क के समर्थन में सर इब्राहीम रहीमतुल्ला जैसे विख्यात व्यक्ति की राय को पेश कर रहा हूं, जिन्होंने मुस्लिम सम्मेलन के अध्यक्ष पद से बोलते हुए यही टिप्पणी की थी। यह याद रहे कि मैं यह वक्तव्य, सरकार ने मुसलमानों की शिक्षा के लिए जो प्रयत्न किए हैं, उनमें दोष निकालने के लिए या ईर्ष्या भाव से नहीं दे रहा हूं। मैं यहां केवल इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह देश विभिन्न जातियों से मिलकर बना है। इन सभी जातियों