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शिक्षा के लिए अनुदान

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है, क्योंकि हम जितना चाहें कह लें कि हम एक हैं, हम निश्चित रूप से एक दूसरे से अलग हैं।

तीसरा मुद्दा जिसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं और मुझे आशा है कि माननीय मंत्री इस पर भली-भांति विचार करेंगे, वह है दलित जातियों के लड़कों को छात्रवृत्ति देने की पद्धति। सहायता के रूप में छात्रवृत्ति किसी भी प्रकार की सहायता न होने से बेहतर है। फिर भी, मेरे माननीय मित्र, शिक्षा मंत्री, मेरी यह बात मान लें कि मेरी पूछताछ और मेरे अनुभव बताते हैं कि छात्रवृत्ति देने की जो पद्धति है, वह वास्तव में सरकारी धन की बरबादी है। दलित वर्ग के बच्चों के माता-पिता इतने गरीब और अनभिज्ञ हैं कि वे यह नहीं समझ पाते कि सरकार द्वारा दी गई सहायता वास्तव में उनके बच्चों को शिक्षित बनाने के लिए है। वे छात्रवृत्ति को अपने खर्च को पूरा करने वाली सहायता के रूप में लेते हैं। एक प्रकार से यह छात्रवृत्ति बच्चे की शिक्षा के काम नहीं आती, जो कि उसका प्रथम उद्देश्य है। महोदय! दूसरी बात यह है कि मुझे अनुभव है कि छात्रवृत्ति से लड़का अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुंच सकता। इसके विभिन्न कारण हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि दलित वर्ग का लड़का बुरे माहौल में पलता है . . . .

एक माननीय सदस्य : इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : भगवान ही जाने। वह ऐसी परिस्थितियों में पलता है, जो किसी भी तरह से वांछनीय नहीं हैं। जब किसी लड़के को छात्रवृत्ति मिल जाती है, तो वह हर प्रकार के बुरे प्रभावों का शिकार हो जाता है। उचित दिशा-निर्देशन के अभाव में उसे पढ़ाई छोड़ देनी पड़ती है और इस प्रकार उस पर खर्च होने वाला धन बेकार हो जाता है। इसलिए मैं माननीय मंत्री को सुझाव देना चाहता हूं कि क्या यह बेहतर नहीं होगा कि वह इस धन का उपयोग छात्रावासों की अभिवृद्धि के लिए करें, जिसे या तो सरकार खुद बनाए-चलाए या यह काम पिछड़ी जातियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाली निजी संस्था करे। महोदय! इससे दोहरी बचत होगी। सबसे पहली बात तो यह है कि छात्रावास लड़कों को गंदे माहौल से दूर रखता है। उसे प्रभावी निरीक्षण उपलब्ध होता है और जब छात्रावास की व्यवस्था निजी संस्था द्वारा की जाएगी, तो सरकारी धन की कुछ बचत होगी।

महोदय! मेरे पास बोलने के लिए जो थोड़ा समय शेष है, उसमें मैं तीन सुझाव ही देना चाहता हूं। मुझे आशा है, मेरे माननीय मित्र शिक्षा मंत्री इन पर ध्यानपूर्वक विचार करेंगे और इस मामले में आवश्यक कार्यवाही करेंगे।