बंबई विश्वविद्यालय अधिनियम-संशोधन विधेयक
II *
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! खंड 3 में अपना संशोधन प्रस्तुत करने से पहले मैं संशोधन में टंकक से जो भूल हो गई है, उसे ठीक करना चाहता हूं। संशोधन को इस प्रकार पढ़ा जाए :
निगमित कॉलेज एक ऐसी संस्था है, जिसका गठन और प्रबंध स्वयं विश्वविद्यालय
द्वारा उन विशेष विषयों के अध्ययन के लिए किया जाता है, जिनके लिए पर्याप्त
प्रबंध अन्य कॉलेजों में नहीं है, आदि।
महोदय! मैं जिस संशोधन को प्रस्तुत करना चाहता हूं, वह एक अनुवर्ती संशोधन
है, जो विधेयक के खंड 25 के मुख्य संशोधन के पारित किए जाने पर निर्भर है,
जिसे मैं प्रस्तुत करूंगा। यदि यह संशोधन पास नहीं किया जाता है, तो उस संशोधन
को प्रस्तुत करना मेरे लिए जरूरी नहीं होगा। इसलिए मेरा निवेदन है कि खंड 25
के मेरे मुख्य संशोधन के पारित होने के बाद मुझे उस संशोधन को प्रस्तुत करने की
अनुमति दी जाए। यदि मैं उस संशोधन को अब प्रस्तुत करता हूं और बाद में मेरा
मुख्य संशोधन अस्वीकृत हो जाता है, तो सदन का समय नष्ट होगा।
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : माननीय अध्यक्ष महोदय! खंड 7 के मेरे संशोधन का प्रथम हिस्सा एक अनुवर्ती संशोधन है, जो खंड 25 के संशोधन पर निर्भर है। महोदय! इसलिए आपसे मेरा अनुरोध है कि खंड 25 के संशोधन पर कार्यवाही पूरी होने तक उसे रोके रखा जाए।
माननीय अध्यक्ष : मैं इसे रोके रखूंगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मेरा ख्याल है कि खंड 7 के मेरे दूसरे संशोधन के संबंध में माननीय मंत्री इस बात पर विचार करने के लिए कुछ समय चाहेंगे कि क्या वह मेरे संशोधन में कोई और संशोधन कर सकते हैं, जिसके लिए हम दोनों ही सहमत हों।
माननीय अध्यक्ष : क्या माननीय सदस्य अपना संशोधन पेश करेंगे?
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : खंड 7 का मेरा दूसरा संशोधन इस प्रकार है : विधेयक में निम्नलिखित खंड सम्मिलित किया जाएः
7 (ख) सरकारी कोष से सहायता अनुदान देने के लिए सरकार द्वारा सिर्फ
विश्वविद्यालय को ही मान्यता दी जाएगी और विश्वविद्यालय के माध्यम के सिवाए
किसी भी कॉलेज को अनुदान राशि नहीं दी जाएगी।
मैंने जिस संशोधन के बारे में नोटिस दिया है, उसमें ‘कॉलेज’ शब्द के बाद ‘सिवाए’ शब्द जोड़ना चाहूंगा। यह टंकक की भूल की वजह से रह गया था।
* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 21, पृ. 250-53, 1 अक्तूबर 1927