4. बंबई विश्वविद्यालय अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 77

60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

महोदय! इस संशोधन को प्रस्तुत करने के मेरे ये कारण हैं। नए अधिनियम के अंतर्गत विश्वविद्यालय को शिक्षा प्रदान कराने की अपेक्षा प्रत्यक्ष रूप से अत्यधिक जिम्मेदारी डाली गई है, इस बात को मानना होगा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज प्राथमिक संस्थाएं होंगी, जो विश्वविद्यालय के अंतर्गत व्यावहारिक रूप से शिक्षा प्रदान करने का कार्य करेंगे। महोदय! मेरा कहना है कि अगर विश्वविद्यालय को कॉलेजों में दी जाने वाली शिक्षा के कार्य-संचालन को नियंत्रित करने के कुछ अधिकार नहीं दिए जाते हैं, तो शिक्षा के स्तर को कायम रखने के लिए विश्वविद्यालय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। विश्वविद्यालय को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए कॉलेजों और उनके शिक्षा के कार्य-संचालन पर नियंत्रण रखने के लिए अधिकार दिए जाने चाहिए। महोदय! वर्तमान अधिनियम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के पास कॉलेजों पर नियंत्रण रखने का एक ही उपाय यह है कि विश्वविद्यालय कुछ नियुक्तियां करता है, जिसे मेरी जानकारी के अनुसार, निरीक्षक समिति कहा जाता है। समिति इन कॉलेजों का कुछ निश्चित समय के बाद दौरा करके निरीक्षण करती है और यह पता लगाती है कि उनकी प्रबंध-व्यवस्था और साज-सामान में क्या कमियां हैं। मेरे विचार में यह समिति . . .

श्री पी.आर. चिकोदी : नियमानुसार एक आपत्ति उठाना चाहता हूं। मैं यह जानना चाहता हूं कि माननीय सदस्य के संशोधन की सही शब्दावली क्या है?

माननीय अध्यक्ष : यह पढ़ा जा चुका है कि ‘सिवाए’ शब्द जोड़ा गया है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! इन कॉलेजों पर विश्वविद्यालय का नियंत्रण जिससे कि वह कॉलेजों पर अपने नियम लागू कर सकता है, इस निरीक्षक समिति की रिपोर्ट के द्वारा ही हो सकता है। मैं समझता हूं कि यह निरीक्षक समिति, कभी-कभार निरीक्षण-दौरे पर जाती है और कॉलेज के प्रबंध में पाई जाने वाली कमियों पर रिपोर्ट तैयार करती है। यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय की स्थायी समिति को प्रस्तुत की जाती है और स्थायी समिति निरीक्षक समिति द्वारा बताई गई कमियों के बारे में अपने विचार विद्या परिषद (सिंडिकेट) के समक्ष रखती है। इस समय विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों के नियंत्रण के लिए बनाए गए अनुशासन के नियमों को लागू करने के लिए बस इतना ही किया जाता है। मेरा कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अगर कॉलेज इस निरीक्षक समिति की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो विश्वविद्यालय के पास सिर्फ एक ही प्रभावशाली अधिकार है कि वह इन कॉलेजों को असंबद्ध कर सकता है। महोदय! मेरा कहना है कि यह अधिकार बहुत कठोर है, यह अधिकार उन्मूलन का अधिकार है। वास्तव में, व्यावहारिक रूप से विश्वविद्यालय के पास कॉलेजों की कार्य-प्रणाली में संशोधन करने का कोई अधिकार नहीं है। दूसरे शब्दों में, कॉलेजों पर अपने नियंत्रण की वर्तमान प्रणाली के अंतर्गत विश्वविद्यालय संबद्ध या असंबद्ध करके किसी कॉलेज को बना सकता है या